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जन्म कुंडली: जिन स्त्रियों की कुंडली में बनते हैं ऐसे योग, उन्हें नहीं मिलता संतान सुख

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Child happiness

एक स्त्री के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण सुखों में से एक होता है मां बनने का सुख यानी कि संतान , जब उसे अहसास होता है कि उसके अंदर एक नन्ही सी जान पल रही है तभी से ही वो मां बनने की अनुभूति प्राप्त करने लगती है। नौ माह तक मां बनने जा रही है उस औरत के लिए हर एक पल का इंतजार करना कि कब उसका बच्चा दुनिया में आएगा और वह कब उसे अपने हाथों में उठाएगी वह सब बहुत खास होता है, इन अहसासों को शब्दों में पिरोना संभव नहीं है।

जिस तरह मां को बच्चे का इंतजार होता है उसी तरह विवाह के बाद हर वर-वधू की पहली इच्‍छा संतान सुख की प्राप्ति ही होती है। हर दंपति की यह इच्छा होती है कि उनके घर भी संतान हो। जिससे वो भी आनन्द का अनुभव कर सकें। शास्त्रों की मानें तो संतान प्राप्ति को दुनिया में सबसे अधिक सुखदायक माना जाता है। लेकिन इस चाहत को पूरा होने में तब विघ्न पड़ता है, जब पति-पत्नी को इस बात का पता चलता है कि वो संतान का सुख नहीं पा सकते हैं।

जी हां इसके पीछे कारण हो सकते हैं लेकिन आज हम बात करेंगे विशेष रूप से ज्योतिषीय कारण की जो जन्म कुंडली में लगे दोष होते हैं। हालांकि ज्योतिष के आधार पर यह आसानी से तय किया जा सकता है कि किसे, किस उम्र में संतान का सुख प्राप्त होगा तथा किन योगों के कारण मनुष्य संतान सुख से वंचित रह सकता है। जैसे कि दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष, पितृ दोष लगने, पति का शुक्र ग्रह उचित स्थिति में न होना, महिला की कुंडली में बांझ योग का होना आदि।

आज हम विशेषरूप से बात करेंगे महिलाओं के कुंडली में बांझ योग के बारे में जिसकी वजह से उन्हें संतान का सुख आसानी से नहीं मिल पाता है। यही नहीं इस योग के कारण शादी के बाद महिला को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बांझ योग का बनना

सबसे पहले तो ये जान लें कि अगर किसी महिला की कुंडली में पंचम भाव का स्वामी सप्तम भाव में और सप्तमेश यानी सप्तम भाव का स्वामी अशुभ ग्रहों के साथ हो तो बांझ योग बनता है।

अगर किसी महिला की कुंडली का पंचम भाव बुध ग्रह के कारण अशुभ हो गया है या फिर कुंडली के सप्तम भाव में शत्रु राशि या नीच राशि का बुध स्थित है तो स्त्री को संतान सुख प्राप्त करने में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

अगर किसी महिला की कुंडली के पंचम भाव में राहु हो और उस पर शनि की दृष्टि हो, सप्तम भाव पर मंगल और केतु की नजर हो, शुक्र अष्टम भाव का स्वामी हो तो संतान पैदा करने में समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

इतना ही नहीं इन योग के अलावा अगर महिला की कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य नीच का हो या शनि नीच का हो तो भी संतान प्राप्ति में समस्याएं आने लगती हैं।

संतान सुख प्राप्ति के लिए ये हैं ज्योतिष उपाय

अगर आप भी बांझ योग की स्थिति से जूझ रही हैं तो आप इन उपायों को कर संतान सुख की प्राप्ति कर सकती हैं।

रामेश्वरम् तीर्थ में जाकर स्नान करें।
गोपाल सहस्रनाम का पाठ करें।
कुंडली के पंचम-सप्तम भाव अशुभ ग्रहों के उपाय करें।
गाय के दूध का सेवन करें।
शिव-पार्वती की पूजा रोज करें।
गोदान एवं कन्यादान करें।
रविवार को मंदिर में दो फल चढ़ाएं और जन्म, लग्न व पंचमेश से संबंधित रत्न धारण करें।

जन्म कुंडली विशेषज्ञ पंडित श्री टी आर शास्त्री को 45 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। 25 वर्षों से ज्योतिष का अभ्यास कर रहे हैं और एक व्यक्ति की हथेली और उनके चेहरे को देखकर भविष्य की भविष्यवाणी करने में माहिर हैं। इस समस्या में आपकी बेहतर तरीके से मदद कर सकते हैं।

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