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ओणम: क्यों मनाया जाता है यह पर्व, क्या है इसके पीछे का महत्व? (Onam: Why this festival is celebrated, what is the significance it?)

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ओणम

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत एक विविधता से भरा हुआ देश है, यहां पर कई धर्मों, संस्कृतियों के लोग निवास करते हैं। वहीं अलग-अलग संस्कृतियों के लोग अलग-अलग पर्व भी मानाते हैं। इनमें से कुछ त्योहार ऐसे होते हैं जो लगभग देश के सभी हिस्सों में मनाए जाते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो किसी-किसी राज्य में ही मनाए जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही पर्व के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं दरअसल हम बात कर रहे हैं ओणम की। लोगों को ये तो पता है कि ओणम केरल में काफी धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन यह नहीं पता है कि आखिर ओणम का महत्व क्या है ? ओणम केरल का प्रमुख पर्व है, इसलिए आज हम आपको इसके इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं।

ओणम का इतिहास व धार्मिक महत्व

ओणम को खासतौर पर खेतों में फसल की अच्छी उपज के लिए मनाया जाता है। किसान अपने फसलों की सुरक्षा और अच्छी उपज के लिए श्रावण देवता और पुष्पदेवी की आराधना करते हैं। फसल पकने की खुशी लोगों के मन में एक नई उम्मीद और विश्वास जगाती है। वैसे हर पर्व के पीछे एक कहानी होती है ओणम को मनाने के पीछे भी एक पौराणिक मान्यता छिपी हुई है। कहा जाता है कि यह पर्व राजा महाबली के स्वागत में मनाया जाता है।

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माना जाता है कि ओणम के दिन राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने के लिए पाताल लोक से पृथ्वी पर आते हैं। कहते हैं कि 10 दिनों तक मनाए जाने वाले इस पर्व के दिनों में पूरे घर की विशेष साफ-सफाई की जाती है। इसके बाद लोग पूरे घर को फूलों से सजाते हैं, फूलों के पंखुड़ियों से बनाई जाती है वृत्ताकार रंगोली बनाते हैं। वहीं इसके बाद एक पारंपरिक दावत समारोह का आयोजन भी करते है जिसमें मीठे व्यंजनों के अलावा नौ स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं जिनमें पचड़ी काल्लम, ओल्लम, दाव, घी, सांभर, केले और पापड़ के चिप्स मुख्य रूप से बनाए जाते हैं।

इन व्यंजनों को केले के पत्तों पर परोसा जाता है। लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिवार वालों को इस पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। इतना ही नहीं इसके अलावा नृत्य, लोकगीत और खेलों का आयोजन किया जाता है। ओणम के दौरान होने वाली नौकादौड़ देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं।

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10 दिनों तक मनाया जाता है ओणम का पर्व

यह केरल राज्य का बेहद ही खास पर्व है, लेकिन इसे अन्य पड़ोसी राज्यों में भी मनाया जाता है। 10 दिनों तक चलने वाला यह पर्व इस साल 01 सितंबर से शुरू हो गया है और 13 सितंबर तक चलेगा।

मलयाली पंचांग के अनुसार, कोलावर्षम के पहले महीने छिंगम में ओणम उत्सव मनाया जाता है। वहीं, ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से ये पर्व अगस्त से सितंबर के बीच पड़ता है जबकि, हिंदी पंचांग के अनुसार, ओणम, श्रावण शुल्क त्रयोदशी को मनाया जाता है।

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