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क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति और कैसे करें इस दिन पूजा ? (Why is Makar Sankranti celebrated and how to do Puja?)

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मकर संक्रांति का दिन पतंग महोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग पतंग उड़ाने का आनंद लेते हैं और साथ ही स्वादिष्ट पकवान भी खाते हैं। इस अवसर पर प्रातः काल उठकर स्नान करना और सूर्य देव को जल अर्पण करना शुभ माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों में तिल और गुड़ की लड्डू भी बनाते हैं जो सिर्फ धार्मिक तौर पर शुभ होता है बल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं। संक्रांति के अवसर पर नदी में नहाना भी शुभ माना जाता है।

Makar Sankranti Puja
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क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति ?

मकर संक्रांति के दिन को लेकर अक्सर लोग अस्मजस में पड़ जाते हैं। सालों से वैसे तो संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन कुछ वर्षों से ये 15 तारिक को मनाई जाने लगी है। दरअसल इस अवसर पर सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है शास्त्रों के अनुसार सूर्य मकर राशि में 14 की शाम को प्रवेश कर रहे हैं और इसी कारण संक्रांति का त्यौहार 14 की जगह 15 को मनाया जाने वाला है।

हमारे देश में मकर संक्रांति बड़े ही धूम धाम से मनाई जाती है। इस दिन लोग अलग अलग तरीके से इस त्यौहार को मनाते हैं, कई लोग इस दिन पतंग उड़ाने का खेल भी खेलते हैं। हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत महत्त्व है, पौष मास में सूर्य जब मकर राशि पर आता है तब संक्रांति की पूजा की जाती है। माना जाता है मकर संक्रांति के अवसर पर दान पुण्य करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार ये भी माना जाता है की इस दिन सर्या देव अपने पुत्र शनि से मिलने गए थे। शनि मकर राशि के स्वस्मि है और इसी कारण इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन मॉल मॉस खत्म होता है और शुभ मॉस का प्रारंभ होता है।

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मकर संक्रांति की पूजा

15 जनवरी को मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाने वाला है। इस दिन पूजा पाठ करने से हर मनोकामना पूर्णहोती है। पूजा के लिए प्रातः काल उठकर स्नान करें और नाहने के पानी में तिल मिलाएं। संक्रांति के अवसर पर लाल कपडे पहनना भी शुभ माना गया है ऐसे में लाल वस्त्र धारण करें। संक्रांति के अवसर पर कई लोग व्रत भी करते हैं अगर आप भी व्रत कर रहे हैं तो इस बात रखें की आप इस दिन दान पुण्य ज़रूर करें।

संक्रांति पर सूर्य की पूजा करें, इस बात का ध्यान रखें की आप सूर्य को जल तांबे के लोटे से दें और इस जल में लाल फूल, तिल, गुड़ और लाल चन्दन भी मिलाएं। सूर्य को अर्पित करने वाले जल को या अर्पित किये हुए जल को पाँव ना लगाएं। जल को पाऊँ लगने से बचाने के लिए आप बर्तन में जल अर्पित करें और इसे पौधे में डाल दें। संक्रांति के पावन अवसर पर अपने पितरों को याद करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन आप गायत्री मंत्र के साथ ॐ सूर्याय नमः का उच्चारण भी कर सकते हैं।

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