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गणेश जी को क्यों माना गया है प्रथम पूजनीय? (Why Ganesh is worshiped first?)

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गणेश

शास्त्रों में गणेश जी को प्रथम पूजनीय माना गया है, शिवजी और पार्वती के पुत्र हैं। गणों के स्वामी होने के कारण उनका एक नाम गणपति भी है। ज्योतिष शास्त्र में तो इन्हें केतु का देवता माना जाता है और जो भी संसार के साधन हैं, उनके स्वामी श्री गणेशजी हैं। हाथी जैसा सिर होने के कारण उन्हें गजानन भी कहते हैं। लेकिन क्या आपको ये पता है कि हिन्दू शास्त्रों के अनुसार किसी भी कार्य के लिये पहले पूज्य है इसलिए उन्हें प्रथमपूज्य भी कहा जाता है।

आपने देखा होगा कि ज्यादातर लोग किसी शुभ काम को शुरू करने से पहले संकल्प करते हैं और गणेश जी को याद करते हैं। यही नहीं कई लोग तो शुभारंभ करते समय सर्वप्रथम श्रीगणेशाय नम: लिखते हैं। इसके अलावा यह रिवाज भी है कि सभी देवी-देवताओं से पहले श्री गणेश की पूजा की जाती है। इस रिवाज के बारे में तो अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन ये बात काफी कम लोगों को पता होगा कि सबसे पहले गणेश जी की ही पूजा क्यों की जाती है। तो आइए बताते हैं क्यों की जाती है गणेश जी की सबसे पहले पूजा?

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गणेश जी के प्रथम पूजनीय होने के पीछे है ये कारण

दरअसल, किसी पूजा, आराधना, अनुष्ठान व कार्य में कोई विघ्न-बाधा न आए, इसलिए सर्वप्रथम गणेश-पूजा करके उसकी कृपा प्राप्त की जाती है। हालांकि इसके पीछे एक पौराणिक मान्यता भी है। कहा जाता है कि एक बार समस्त देवताओं में इस बात पर विवाद उत्पन्न हुआ कि धरती पर किस देवता की पूजा समस्त देवगणों से पहले हो। सभी देवता स्वयं को ही सर्वश्रेष्ठ बताने लगे। तब नारद जी ने इस स्थिति को देखते हुए सभी देवगणों को भगवान शिव की शरण में जाने व उनसे इस प्रश्न का उत्तर बताने की सलाह दी।

उस समय जब सभी देवता भगवान शिव के पास गए तो उन्होने इस समस्या को सुलझाने के लिए एक योजना सोची। भगवान शिव जी ने एक प्रतियोगिता आयोजित की। सभी देवगणों को कहा गया कि वे सभी अपने-अपने वाहनों पर बैठकर इस पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर आएं। इस प्रतियोगिता में जो भी सर्वप्रथम ब्रह्माण्ड की परिक्रमा कर उनके पास पहुंचेगा, वही सर्वप्रथम पूजनीय माना जाएगा।

सभी देवता अपने-अपने वाहनों को लेकर परिक्रमा के लिए निकल पड़े। इस परीक्षा में गणेशजी भी थें लेकिन गणेश जी बाकी देवताओं की तरह ब्रह्माण्ड के चक्कर लगाने की जगह अपने माता-पिता शिव-पार्वती की सात परिक्रमा पूर्ण कर उनके सम्मुख हाथ जोड़कर खड़े हो गए।

जब समस्त देवता अपनी अपनी परिक्रमा करके लौटे तब भगवान शिव ने श्री गणेश को प्रतियोगिता का विजयी घोषित कर दिया। सभी देवता यह निर्णय सुनकर अचंभित हो गए और शिव भगवान से इसका कारण पूछने लगे।

तब शिवजी ने उन्हें बताया कि माता-पिता को समस्त ब्रह्माण्ड एवं समस्त लोक में सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जो देवताओं व समस्त सृष्टि से भी उच्च माने गए हैं। तब सभी देवता, भगवान शिव के इस निर्णय से सहमत हुए। तभी से गणेश जी को सर्वप्रथम पूज्य माना जाने लगा।

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गणेशजी को प्रथम पूजनीय ही नहीं बल्कि इन्ही कारणों की वजह से उन्हें अपने तेज़ बुद्धिबल के प्रयोग के कारण देवताओं में सर्वप्रथम पूजा जाने लगा। तब से आज तक प्रत्येक शुभ कार्य या उत्सव से पूर्व गणेश वन्दन को शुभ माना गया है। गणेश जी का पूजन सभी दुःखों को दूर करने वाला एवं खुशहाली लाने वाला है। अतः सभी भक्तों को पूरी श्रद्धा व आस्था से गणेश जी का पूजन हर शुभ कार्य से पूर्व करना चाहिए।

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