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इस बार कब मनाई जाएगी नाग पंचमी, क्या है पूजा करने की सही विधि, मान्यताएं

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नागपंचमी

हमारे हिंदू धर्म में हर माह कोई न कोई त्योहार आते ही रहते हैं, ऐसे में कुछ त्योहारों का महत्व ज्यादा होता है क्योंकि देशभर में लोग उसे मनाते हैं। अभी सावन का महिना चल रहा है, ये हम सभी जानते हैं कि यह माह भगवान शिव को समर्पित होता है व इस माह नाग पंचमी का त्योहार भी आता है। हालांकि भारत में काफी प्राचीन समय से नागों की पूजा करने की परंपरा चलती आ रही है, कई जगहों पर तो नागों की पूजा की परंपरा है।

कुछ जगहों पर तो नाग को देवता मानकर भी पूजा किया जाता है। वहीं अगर बात करें सावन माह में आने वाले नागपंचमी की तो इस दिन विशेष रूप से नागों की पूजा की जाती है, इस साल यह त्योहार 25 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन लोग घर में गोबर से नाग बनाकर और मंदिर में जाकर इनकी पूजा करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि ऐसा करने से सर्पदंश का भय दूर होता है और घर परिवार में सुख समृद्धि आती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग पंचमी के दिन नाग देवता की आराधना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नाग पंचमी का मुहूर्त

पंचमी तिथि प्रारंभ – 14:33 (24 जुलाई 2020)
पंचमी तिथि समाप्ति – 12:01 (25 जुलाई 2020)
नाग पंचमी पूजा मुहूर्त – 05:38:42 बजे से 08:22:11 बजे तक
अवधि – 2 घंटे 43 मिनट

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नाग पंचमी पूजा विधि

अब बात करते हैं नाग पंचमी पर की जाने वाली पूजा विधि की, क्योंकि कई लोगों को सही विधि का ज्ञान न होने के कारण वो पूजा में कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जिससे उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है। सबसे पहले तो बता दें कि पूजा करने के लिए नाग की फोटो या मिट्टी की सर्प मूर्ति को लकड़ी की चौकी के ऊपर रखकर हल्दी, रोली, चावल और फूल चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करें। इसके बाद कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर सर्प देवता को अर्पित करें। इसके बाद उनकी आरती करें और आप चाहे तो इस दिन असली नाग की पूजा करने का भी प्रचलन है। पूजा के अंत में नाग पंचमी की कथा भी सुनी जाती है। ध्यान रहे जो लोग नाग पंचमी का व्रत करते हैं वो दिन में एक बार भोजन करते हैं यानि की चतुर्थी वाले दिन व फिर पंचमी के दिन उपवास करके शाम को व्रत खोलें।

नाग पंचमी का महत्व

बात करें नाग पंचमी की तो इस दिन आठ नाग देवताओं की पूजा का विधान है, इनमें वासुकि, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय नामक अष्टनाग आते हैं। कहते हैं कि इनकी पूजा से भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा जो व्यक्ति इस दिन नाग देवता की पूजा करता है उसे धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता है कि नाग देवता, धन की देवी मां लक्ष्मी की रक्षा करते हैं। इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरुप की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

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सांपों को लेकर क्या है पौराणिक मान्यताएं

कहा जाता है कि इच्‍छाधारी नाग होते हैं, जो रूप बदल सकते हैं।
कुछ दुर्लभ नागों के सिर पर मणि होती हैं।
नागों की स्मरण शक्ति तेज होती है।
सौ वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद नागों में उड़ने की शक्ति हासिल हो जाती है।
नाग जमीन के अंदर गढ़े धन की रक्षा करता है। इसे नाग चौकी कहा जाता है।
नाग संगीत सुनकर झूमने लगते हैं।
नागों को ही सबसे पहले भूकंप, प्रलय या अन्य किसी प्राकृतिक आपता का पता चल जाता है।

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