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उपवास और वेट लॉस फास्टिंग में क्या है अंतर?डायटीशियन सोनाली से जानें | What’s the Difference between fasting and weight loss fasting?

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इंटरमिटेंट फास्टिंग

नवरात्रि का समय चल रहा है देशभर में लोग पूजा पाठ व उपवास माता को प्रसन्न करने के लिए रख रहे हैं। हालांकि इस बार नवरात्र की रौनक बाजार में फीकी देखने को मिल रही लेकिन बात करें पूजा पाठ या व्रत की तो सभी भक्त माता को प्रसन्न करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे। ये बात तो सच है कि हिंदू धर्म में विश्वास रखने वाले लोग व्रत व उपवास रखते हैं।

यह हमारी परंपरा में से एक है, नवरात्र हो या अन्य कोई भी त्योहार उपवास रखने की परंपरा काफी समय से चलती आ रही है। लेकिन आज के समय में बदलती खानपान के कारण लोग वजन कम करने के लिए भी फास्टिंग करते हैं, पर पारंपरिक रूप से किए गए उपवास व वेट लॉस के लिए किए गए फास्टिंग को एक समझना आपकी भूल होगी।

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वेट लॉस व फास्टिंग में व्यक्ति सामान्य रूप से खानपान की आदतों को बदलता है और दिन के ज्यादातर समय भूखा रहता है लेकिन इन दोनों में विशेष अंतर है तो आइए जानते हैं कि इनमें क्या अंतर है ?

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उपवास और फास्टिंग में क्या है अंतर ?

किसी भी धर्म में आप क्यों न हो लेकिन धार्मिक अनुष्ठान को पूरा करने के लिए उपवास रखा जाता है। वहीं कई लोगों का मानना है कि इस दौरान किया गया भोजन दिव्य सत्ता के आशीर्वाद स्वरूप मानने जैसा है इसलिए पारंपरिक उपवास में मुख्य रूप से लोग अन्न खाना छोड़ देते हैं और कुछ ऐसी चीजों का सेवन करना शुरू करते हैं जो सामान्यतः वो नहीं खाते हैं। आज के समय में वेट लॉस के लिए फास्टिंग में भूखा रहने का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि शरीर में कैलोरीज कम जाएं, जिससे शरीर में मौजूद चर्बी बर्न हो और वजन घटने लगे। और इसके लिए लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग को फॉलो करते हैं।

उपवास और वेट लॉस फास्टिंग में क्या खाया जाता है?

जब हम धार्मिक कार्य के लिए उपवास रखते हैं तो बहुत अलग-अलग तरह की चीजें खाते हैं। इसमें कुछ रेगुलर फूड्स को छोड़कर कुछ स्पेशल फूड्स भी खाते हैं जो लोग सामान्यतः साल में बहुत कम बार खाते हैं। कुछ उपवास ऐसे भी होते हैं, जिन्हें आनंद के लिए मनाया जाता है इस दौरान नई-नई डिशेज बनाकर खाया जाता है जैसे- साबूदाना की खिचड़ी, कुट्टू की पूरी, सिंघाड़े की पूरी, सिंघाड़े का हलवा, राजगिरा का आटा आदि।

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वहीं बात करें वेट लॉस फास्टिंग की तो इसके लिए डाइट का चुनाव करते समय इसके पोषक तत्वों को ध्यान में रखते हैं, जैसे- कार्ब्स, प्रोटीन, फैट, फाइबर आदि। आमतौर पर इसके लिए रेगुलर डाइट में से ही कुछ ऐसी चीजों को चुना जाता है, जो लाइट हों और हेल्दी हों, ताकि शरीर को पोषक तत्व भी मिलें और चर्बी भी ज्यादा बर्न हो।

किस आधार पर रखे जाते हैं दोनों तरह के उपवास?

अब सवाल ये आजा है कि ये दोनों ही उपवास किस आधार पर किए जाते हैं, तो पारंपरिक रूप से उपवास सीजन के अनुसार, चंद्रमा की गति के अनुसार, त्यौहारों के आधार पर रखते हैं लेकिन वजन घटाने के लिए उपवास रखने के सिर्फ 2 आधार हैं। पहला वजन घटाना और दूसरा शरीर को सही शेप में लाना। कई पारंपरिक उपवास में दिनभर खाने-पीने की छूट नहीं होती है, बल्कि किसी तय समय पर ही आप आहार ग्रहण कर सकते हैं।

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