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वैदिक व पाश्चात्य ज्योतिष कौन है सबसे बेहतर, क्या है अंतर ?

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Vedic or Western astrology

ज्योतिष के जरिए लोग भविष्य की जानकारी के साथ ही साथ तमाम समस्याओं से छुटकारा भी पा सकते हैं। ज्योतिष की चर्चा वेद पुराणों में भी की गई है, कहा जाता है कि ज्योतिष एक ऐसा माध्यम है जो हमें अँधेरे से प्रकाश की और ले जाता है लेकिन इसका क्षेत्र काफी व्यापक है। ज्योतिष में भी वैदिक या पाश्चात्य ज्योतिष होते हैं।

यह पूरी ज्योतिष विद्या सूर्य राशि और चंद्र राशि पर भ्रमण करती है यानि की चंद्र राशि की उपयोगिता वैदिक ज्योतिष में होती है, जबकि सूर्य राशि पाश्चात्य ज्योतिष का आधार है। इन दोनों में फर्क बताने से पहले आपको ये बता दें कि ज्योतिष एक विद्या है और वैदिक ज्योतिष व फलित ज्योतिष उसके प्रकार है। ऐसे ही बहुत सी अलग अलग ज्योतिष पद्धतियां हैं जो आज भी प्रचलन में लाई जाती हैं।

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क्या है वैदिक ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष के बारे में बात करें तो कहा जाता है कि यह ज्योतिष का एक ऐसा पहलू है जिसका विकास वैदिक काल में हुआ है। इस काल में मानव सभ्यता का सबसे ज्यादा विकास हुआ है, खासकर भारतीय उप महाद्वीप में इस सारी प्रथा नियम आदि का निर्माण हुआ। बताया जाता है कि इसी दौरान ज्योतिष को भी लिपिबद्ध किया गया होगा। आकाश मंडल में विचरने वाले ग्रहों जैसे सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध के साथ राशियों एवं नक्षत्रों का अध्ययन, गणना के क्रम को निर्धारित करता है।वैदिक ज्योतिष के अनुसार आकाश को 360 डिग्री मानकर इसे12 राशियों और 27 नक्षत्रों में बांटा गया है। लोग इसे हिंदू ज्योतिष भी कहते हैं।

क्या है पाश्चात्य ज्योतिष

पाश्चात्य ज्योतिष का ज्योतिष के आधुनिक प्रकारो के तौर पर समझ सकते हैं। जिसमें मनुष्य तथा पृथ्वी पर, ग्रहों और तारों के शुभ तथा अशुभ प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। इन ग्रहों, नक्षत्रों के की गणनाओं के आधार पर भविष्य में होने वाली घटनाओं की संभावनाओं को व्यक्त किया जाता है। हम सभी जानते हैं कि ज्योतिष में अलग अलग उद्देश्य के लिए ज्योतिषी की जाती है जिस ज्योतिष का उपयोग फल अर्थात प्रभाव जानने के लिए किया जाता है इसलिए इसे फलित ज्योतिष भी कहा जाता है।

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वैदिक व पाश्चात्य ज्योतिष अलग-अलग क्षेत्रों में है विशेष

जैसा कि हमने पहले भी बताया कि पाश्चात्य ज्योतिष सूर्य की गतिविधियों पर निर्भर करता है, जिसकी वजह से वो व्यक्ति के मनोविज्ञान, व्यक्तित्व और चरित्र पर अधिक जोर देता है। लेकिन वहीं बात करें वैदिक ज्योतिष की तो इसकी गणना की पद्धति चंद्रमा पर आधारित होती है, जिसमें जीवन के सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए कहा जाता है कि अगर किसी भी व्यक्ति के जन्म का सही व विस्तृत जानकारी देकर उसके भूत, वर्तमान और भविष्य की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यह कर्म और नियति के सिद्धांत को भी ध्यान में रखता है।

वैदिक व पाश्चात्य ज्योतिष कौन है श्रेष्ठ

वेदों व पुराणों में वैदिक ज्योतिष की चर्चा हैं। वहीं इसके गणना के आधार की बात करें तो वैदिक ज्योतिष विज्ञान जहां निरयन पद्धति पर बने पंचाग को महत्व देता है वहीं पाश्चात्य ज्योतिष में सायन पद्धति प्रचलित है। वैदिक ज्योतिष बहुत प्रभावी होने के साथ ही काफी सटीक भी है, जबकि पाश्चात्य ज्योतिष केवल संभावित घटनाओं की सीधी व्याख्या दे सकती है।

भारतीय ज्योतिषियों में वैदिक ज्योतिष को ही श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह अपने साथ ही प्राचीन ज्ञान अपने आप में कुछ जटिलताओं को समटे हुए है। हालांकि यह भी सच है कि ये दोनों ही प्रकार के ज्योतिष का भविष्य फल कथन में सफलतापूर्वक प्रयोग किया सकता है। ये दोनों ही ज्योतिष शास्त्र इंसान के जीवन में आइए समस्याओं से छुटकारा दिलाता है और जीवन को खुशहाल बनाने में मदद करता है। वैदिक ज्योतिष से जुड़ी जानकारी के लिए आप पुलकित गुप्ता से संपर्क कर सकते हैं।

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