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आइए जानें, योग व ध्यान में ॐ शब्द और १०८ का क्या है कनेक्शन?

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Sound of Om and sacred no 108 in yoga/meditation practice

हम सभी ये तो जानते ही हैं कि योग का चलन काफी प्राचीन समय से है, वेदों से ही योग की उत्पत्ति हुई। समय-समय पर इस योग को कई ऋषि-मुनियों ने व्यवस्थित रूप दिया। आदिदेव शिव और गुरु दत्तात्रेय को योग का जनक माना गया है। शिव के ७ शिष्यों ने ही योग को संपूर्ण धरती पर प्रचारित किया। योग व ध्यान का प्रत्येक धर्म पर गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। यही कारण है कि हिंदू धर्म के रहस्यमयी अंक १०८ का भी योग से गहरा कनेक्शन है।

सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि हिंदू धर्म में १०८ संख्या को बहुत पवित्र माना गया है। इस १०८ अंक का रहस्य काफी गहरा है। आपने अक्सर देखा होगा कि किसी भी माला में १०८ मनके होते हैं। वैसे आपके मन में इसे लेकर कई सवाल आते होंगे कि १०८ ही क्यों? इसके पीछे हर किसी का अपना सिद्धांत हैं।

माना जाता है कि १०८ मनकों और सूर्य की कलाओं के साथ बेहद गहरा रिश्ता है क्योंकि एक साल में सूर्य २ लाख, १६ हजार बार कलाएं बदलता है। दो बार अपनी स्थिति में परिवर्तन कर छह माह उत्तरायण और छह माह ही दक्षिणायन रहता है। यानि की हर छह महीने में सूर्य १ लाख ८ हजार बार कलाओं में परिवर्तन करता है। संख्या १०८,००० में अंतिम तीन शून्यों को हटाकर १०८ मनके निर्धारित किए गए हैं। हर मनका सूर्य की कलाओं का प्रतीक है। इसके पीछे मान्यता है कि सूर्य का तेज माला के हर मनके के जरिए व्यक्ति के जीवन में प्रवेश करता है।

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वहीं ज्योतिष शास्त्र की बात करें तो ब्रह्मांड को १२ भागों में विभाजित किया गया है। इन १२ भागों के नाम मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन १२ राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। यानी ग्रहों की संख्या ९ का गुणा किया जाए राशियों की संख्या १२ में तो संख्या १०८ प्राप्त हो जाती है। इसके साथ ही कुल २७ नक्षत्र होते हैं। हर नक्षत्र के ४ चरण होते हैं और २७ नक्षत्रों के कुल चरण १०८ ही होते हैं। माला का एक-एक दाना नक्षत्र के एक-एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है। इन्हीं कारणों से माला में १०७ मोती होते हैं।

लेकिन बात करें योगशास्त्र की तो शरीर में १०८ तरह की विशिष्ट ग्रथियां होती हैं, उनका परिष्कार हो सके तो अध्यात्म पथ पर आसानी से बढ़ा जा सकता है। ऐसा करने से संपूर्ण शरीर की शुद्धि जाप के जरिए हो जाती है। कहते हैं कि माला के १०८ मनकों का उन ग्रंथियों से गहरा संबंध होता है। यही वजह है कि योग या फिर मेडिटेशन में भी १०८ बार ऊं का जाप करने को कहा गया है।

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योग व ध्यान में ॐ का महत्व

योग व ध्यान में ॐ के उच्चारण का गहरा महत्व है। ॐ को ध्यान मंत्र भी कहा जाता है। कहा जाता है की ॐ का उच्चारण मात्र से ही मन में शांती और एकाग्रता आती है। ओम का जाप जरूरी नहीं कि एक धार्मिक प्रतीक हो। बल्कि यह एक बुनियादी ध्वनि है, जो मानव शरीर में कुछ कंपन पैदा करता है। ओ – की ध्वनि से पेट में उ – की ध्वनि से सीने में और म – से नासिका में कम्पन पैदा होती हैं। ऐसे में कुछ लोगों का यह मानना है की ॐ का जाप एकाग्रता में सुधार लाता ​​है। कहते हैं कि ध्यान केंद्रित करने से तनाव और बेचैनी कम कर सकते हैं।

हालांकि इसके अलावा इस मन्त्र के जाप से रक्तचाप को कम करने में मदद मिलेगी और दिल के स्वास्थ्य में सुधार भी हो सकता है। पर ऐसा करने के लिए हर दिन एक निश्चित समय का निर्धारण करने होगा। यही कारण है कि कई योग कक्षाओं में अक्सर ओम के मंत्र के साथ शुरू किया जाता है। क्योंकि योग शास्त्र का मानना है कि किसी भी व्यायाम से पहले अगर ध्यान केंद्रित किया जाए, तो शरीर की गतिविधियां बेहतर बन सकती है।

आप चाहे तो इससे संबंधित जानकारी के लिए योग और फिटनेस विशेषज्ञ विभोर गौर से संपर्क कर सकते हैं।

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