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स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से क्या मिलती है सीख ? (What can we learn from the lives of Freedom Fighters)

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स्वतंत्रता

भारत को आजादी हुए 73 साल पूरे हो चुके हैं। देश 74वीं सालगिरह मनाने जा रहा है। साल 1947 से 2020 तक देश ने कई बड़े बदलाव देखे पर हम उन महान हस्तियों को कैसे भूल सकते हैं जिनकी वजह से आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं। इस स्वतंत्रता दिवस पर हम आपको उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताएंगे और यह भी बताएंगे कि उनसे हमें क्या सीख मिली ?

हालांकि यह भी सच है कि हर व्यक्ति के अंदर एक विशेष गुण पाया जाता है जिसके बल पर वो कुछ विशेष काम कर सकता है, हमारे स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं में भी ऐसी तमाम खूबियां थीं, जिनकी बदौलत उन्होंने देश के लोगों का नेतृत्व करते हुए भारत को आजादी दिलाई। बस अंतर इतना है कि इन्होने अपने अंदर छिपे गुणों को पहचाना और उसका सही जगह पर प्रयोग किया। यही कारण है कि आजादी के इन सच्चे नायकों के बारे में जानकर उनसे कुछ सीख सकते हैं और अपने देश और समाज के लिए भी अपना अमूल्य योगदान दे सकते हैं। इन नायकों का जीवन व कर्म हमारे लिए बड़ी सीख है, ये भले ही आज हमारे बीच नहीं है लेकिन हमें आज भी इनके जीवन से प्रेरणा मिलती है।

ये हैं वो महान स्वतंत्रता सेनानी

महात्मा गांधी ने दिलाइ स्वतंत्रता

इनके बारे में भला कौन नहीं जानता है, राष्ट्रपिता के रूप में जाने जाने वाले महात्मा गांधी के अंदर भी एक खासियत थी कि वो जो ठान लेते थे, फिर उससे पीछे नहीं हटते थे। यही नहीं वो किसी भी तरह का भेदभाव वे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे। तभी तो वो गांधी के साथ अंग्रेजों ने जो भेदभाव किया उससे उनको काफी चोट पहुंचा और यही घटनाएं गांधी के जीवन में एक मोड़ बन गईं। इस जिद्द ने उन्हें महान स्वतंत्रता सेनानी बनने की राह पर ले गई, जिसकी वजह से बाद में अंग्रेज भारत छोड़ने को मजबूर हो गए। हमें गांधी जी के जीवन से सीखने को यह मिला कि जिद्द करना गलत नहीं है लेकिन अगर यह सकारात्मक वजहों के लिए की जाए, तो वह क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है।

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सुभाष चंद्र बोस

इन महान स्वतंत्रता सेनानियों में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का भी नाम आता है जो कि स्वतंत्रता संग्राम के इतने साहसी सेनानी थे कि उन्होंने अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए पूरी एक फौज ही खड़ी कर ली। यही नहीं इसके अलावा इन्होने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लडऩे के लिए आजाद हिंद फौज (आइएनए) का गठन किया। सुभाष चंद्र के अंदर साहस ऐसा था कि सामने वाला चाहे कितना भी बड़ा दुश्मन क्यों न हो वो कभी हार नहीं मानते थें। इनसे आप ये सीख ले सकते हैं कि अगर मन में दृढ़ निश्चय व साहस हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है।

भगत सिंह

बलिदानी क्रांतिकारी महान क्रांतिकारी भगत सिंह महज 14 साल की उम्र में ही पंजाब की क्रांतिकारी संस्थाओं के लिए काम करने लगे थे। वे चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों के संपर्क में आए और बाद में उनके प्रगाढ़ मित्र भी बन गए। 1928 में हुए ‘सांडर्स हत्याकांड’ और 1929 मे हुए ऐतिहासिक ‘असेंबली बमकांड’ के लिए अंग्रेजों ने उन्हें आरोपी बनाया। जिसके बाद 23 मार्च, 1931 की रात सुखदेव और राजगुरु के साथ ही उन्हें भी फांसी दे दी गई। इस तरह महज 24 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने देश के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। इन्होने जरूरत पड़ने पर देश के लिए जीने और मरने तथा कुछ कर गुजरने का जज्बा होना चाहिए, इसके लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती।

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई

देश की आजादी में महिलाओं की भूमिका भी कुछ कम नहीं है, जब भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की बात होती है तो महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की चर्चा जरूर होती है। बचपन से इनके अंदर एक क्रांतिकारी वाले गुण मौजूद थें जिसका इन्होने सही रूप से अंग्रेजों के खिलाफ प्रयोग किया। इनका नाम मणिकर्णिका था, बाद में लक्ष्मी बाई बनीं देवी लक्ष्मी के सम्मान में इन्होंने अपना नाम लक्ष्मी बाई रखा। 14 साल की उम्र में इनका विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव के साथ हुआ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रमुख उपलब्धियां ब्रिटिश सरकार के कानून को पालन करने से इंकार कर दिया मौत से पहले तक इन्होंने अंग्रेज के साथ वीरता से लड़ा। 22 साल की उम्र में ब्रिटिश सेना से लोहा लेते हुए शहीद हो गई।

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वल्लभ भाई पटेल

बात करें वल्लभ भाई पटेल की तो दीवार जैसी दृढ़ता सरदार पटेल बैरिस्टर और प्रसिद्ध राजनेता थे। इसी दृढ़ता की वजह से ही ‘लौह पुरुष’ और ‘सरदार’ की उपाधि दी गई थी। आजाद भारत में देसी रियासतों का विलय कराना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, जो उस वक्त बहुत मुश्किल काम था। अपनी संगठनात्मक कुशलता की बदौलत ही पटेल ये कर पाए। इसलिए उन्हें आधुनिक भारत का शिल्पी भी कहा जाता है। असल में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पांच सौ से भी ज्यादा देसी रियासतों का एकीकरण एक बड़ी समस्या थी। कुशल कुटनीति और जरूरत पडऩे पर सैन्य हस्तक्षेप के जरिए सरदार पटेल ने अधिकांश रियासतों को तिरंगे के तले लाने में सफलता हासिल की। जीवन में दृढ़ता के साथ बड़ी से बड़ी समस्या को भी दूर किया जा सकता है।

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अमोल वागले ना सिर्फ एक मोटिवेशनल स्पीकर है बल्कि वो एक बेहतरीन चेस के खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उन्होंने चेस टीम की कप्तानी करते हुए मुम्बई को चेस चैंपियनशिप में जीत भी दिलाई है। यह तो उनका शौक था मगर इसके अलावा उनके अंदर एक खास खूबी भी है जिसकी मदद से उन्होंने कई लोगों के जीवन की दिशा बदल दी और उन्हें उस अनुभूति का एहसास कराया जो वो दिन रात धन-दौलत आदि काम कर भी नही कर पाये थे। वर्ष 2000 में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से संपर्क में आने के बाद अमोल वागले ने कई लोगों के जीवन को सही मार्ग दिखाया। उन्होंने कई अलग अलग देशों की यात्रा भी की और श्री श्री रविशंकर के आदर्शों पर चलते हुए हजारो को उनके जीवन के उद्देश्य से परिचित कराया।

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