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क्या होते हैं सूर्य नमस्कार के चिकित्सकीय उपयोग, इन गंभीर बीमारियों में होता है लाभ

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Therapeutic uses of Surya Namaskar

योग के बारे में हम सभी जानते हैं वहीं ये भी पता है कि योग में कई सारे आसन होते हैं। लेकिन आज हम विशेषरूप से बात करने जा रहे हैं सूर्य नमस्कार के बारे में जो सभी आसनों में सर्वश्रेष्ठ है, ऐसा इसलिए क्योंकि कोई आसन करें या न करें पर इस एक आसन के कर लेने से शरीर की अनगिनत समस्याएं खत्म हो जाती है। यह अकेला अभ्यास ही इंसान को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है।

इसके बारे में आगे कुछ बात करने से पहले सूर्य नमस्कार 12 योगासनों को मिलाकर बनाया गया है, जिसमें से हर एक आसान का अपना अलग ही महत्व है। योग विशेषज्ञों की मानें तो अगर सूर्य नमस्कार को हर रोज अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आएगी।

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सूर्य नमस्कार करने का क्या है सही तरीका

कोई भी योगासन हो लेकिन उसे करने का सही तरीका आना चाहिए क्योंकि गलत तरीके को अपनाने से हमें उस योगासन का फायदा तो नहीं ही मिलता है बल्कि उसका गलत असर भी हमारे शरीर पर पड़ता है। सूर्य नमस्कार करते समय सबसे पहले तो इस बात का ध्यान रखना रहे कि ये आसन सुबह के समय सूरज की ओर मुख कर के ही करना चाहिये क्योंकि सूरज हमें ऊर्जा प्रदान करता है। 12 आसनों के संगम से बना सूर्य नमस्कार, इसमें एक एक आसन के दौरान गहरी सांस लेनी होती है जिसका शरीर को काफी फायदा होता है। इस आसन को लगातार करते रहने के कुछ ही दिनों के बाद आप अपने अंदर शारीरिक व मानसिक दोनों ही स्तर पर बदलाव देखेंगे।

इससे होने वाले चिकित्सकीय फायदे

आपको जानकर हैरानी होगी कि महज इस एक आसन से आपके शरीर को कई सारे फायदे होते हैं। बात करें इसके चिकित्सीय उपयोग की तो ये आसन हमारे शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है और दिल की धड़कन की अनियमितता को भी ठीक करता है। इसे लगातार करने से डाइबिटिज के हाई लेवल व दिल के दौरे की आशंका कम हो जाती है, क्योंकि साथ ही शरीर में खून का संचार भी दुरुस्त होता है। सूर्य नमस्कार करने से मोटापा दूर होता है, मन की एकाग्रता बढ़ती है, शरीर में लचीलापन आता है, पेट ठीक रहता है, सुंदरता में निखार आता है तथा शरीर की खराब मुद्रा भी ठीक हो जाती है। 

सूर्य नमस्कार के दौरान स्ट्रेचिंग से मांसपेशी और लीगामेंट के साथ रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और कमर लचीला होता है। इन सबके अलावा ये आसन करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है और नर्वस सिस्टम शांत होता है जिससे आपकी चिंता दूर होती है। महिलाओं को अनियमित मासिक चक्र की समस्या से निजात मिलता है। बताया जाता है कि इस आसन को लगातार करने से बच्चे के जन्म के दौरान भी दर्द कम होता है। हालांकि यह भी सच है कि सूर्य नमस्कार करने आप जितनी तेजी से वजन कम कर सकते हैं, उतनी जल्दी डायटिंग से भी फायदा नहीं होता।

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किसे नहीं करना चाहिए सूर्य नमस्कार

ये बेहद ही महत्वपूर्ण सवाल है, इसके बारे में हर किसी को पता होना चाहिए।

सबसे पहले तो ध्यान रहे कि जो महिलाएं गर्भवती हैं उन्हें तीसरे माह के बाद ये आसन करना बंद कर देना चाहिए।

हर्निया और हाई ब्लडप्रेशर वाले मरीजों को सूर्य नमस्कार नहीं करनी चाहिए।

जिन लोगों को पीठ दर्द की समस्या है तो वो सूर्यनमस्कार शुरू करने से पहले उचित सलाह जरूर लें।

ध्यान रहे कि महिलाएं अपनी पीरियड के दौरान सूर्यनमस्कार आसन न करें वो चाहें तो कोई और आसन कर सकती हैं।

अगर आपको सूर्यनमस्कार या फिर योग से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी प्राप्त करनी है तो आप हमारे नेटवर्क के जरिए योग विशेषज्ञ भावना से संपर्क कर सकते हैं। ये आपको योग से जुड़ी तमाम सवालों का जवाब देंगी व फिट रहने में भी आपकी काफी मदद करेंगी। 

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