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लॉकडाउन अकेलेपन व निराशा से जूझ रहे हैं, तो करें ये काम

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what to Do Feeling Lonely and Depressed

जीवन में कई समस्याएं आती हैं जिनमें से कुछ ऐसी होती हैं जो सभी को नजर आती है लेकिन कुछ ऐसी होती है जो इंसान को मन ही मन परेशान करते रहती हैं। ये बेहद ही कठिन समय चल रहा है लोग अपनी दिनचर्या को लेकर काफी ज्यादा चिंतित हो गए है। लॉकडाउन ने हम सभी की जिंदगी बदलकर रख दी है।

लॉकडाउन का ये समय लगातार बढ़ता ही जा रहा है और यही वजह है कि लोगों के अंदर मानसिक विकार भी घर कर रहा है। ये मानसिक विकार अलग अलग तरह के हो सकते हैं। पर आज हम बात करेंगे खासकर अकेलापन व निराशा महसूस करने वाले लोगों के बारे में, हालांकि ये दोनों ही चीजें जब अत्यधिक हो जाती हैं तो व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है।

अकेलापन

लॉकडाउन में घरों में लोग एकाएक बंद हो गए है, ऐसे में बाहर निकलना रिश्तेदारों व दोस्तों से मिलना सबकुछ बंद हो गया है। जाहिर सी बात है कि इस समय अधिकतर लोगों को अकेलापन अंदर ही अंदर खाए जा रहा। लेकिन इसके अलावा सामान्य दिनों में भी ये समस्या लोगों में देखने को मिलती हैं, मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अकेलापन एक ऐसी भावना है जिसमें लोग बहुत तीव्रता से खालीपन और एकांत का अनुभव करते हैं।

अकेले व्यक्ति को मजबूत पारस्परिक सम्बन्ध बनाने में कठिनाई होती है। वैसे यह भी सच है कि अकेलेपन का अर्थ अकेले रहना नहीं है बल्कि हज़ारों लोगों के बीच में अकेला महसूस करना है। यह समस्या किसी भी कारणवश, जिंदगी के किसी भी पल व किसी के भी साथ हो सकती है।

लॉकडाउन में अकेलापन से कैसे निकले बाहर

१़. अपने आप से प्यार करना अकेलेपन को अपने से दूर करने का सबसे आसान और अच्‍छा तरीका होता है। ये तो सच है कि स्वयं को खुद से ज्यादा ना तो कोई जानता है और ना ही समझता सकता है।

२. अकेले होने की भावना आने पर कोशिश करें ख़ुद पर ध्‍यान केंद्रित करने की, अपने गुणों को पहचाने और कुछ नया करने की सोचें। हो सके तो वही काम करें जिसे करके आपको खुशी मिलती हो।

३. लॉकडाउन में अकेलेपन की भावना को दूर रखने के लिए सबसे अच्छा तरीका है दूसरों को ख़ुशी देने की कोशिश करना। कोई सामाजिक काम करना ऐसे लोगों के साथ रहकर आपको अच्छा महसूस होगा।

४. वैसे आपने ये कई बार सुना होगा कि हंसी स्वास्थ्य के लिए दवाई का काम करती है। हंसी-मज़ाक और खुश रहने से शरीर में एंडोर्फिन नाम का हॉर्मोन निकलता है जिससे क्रोध और दुःख कम होता है।

५. संगीत हमारे शरीर और मन के लिए एक टॉनिक की तरह काम करता है। यह अकेलेपन से निकलने में आपकी मदद करता है।

६. वैसे तो आजकल सोशल मीडिया को समय की बर्बादी के रूप में देखा जाने लगा है लेकिन इसके कुछ फ़ायदे भी हैं, लोग इससे जुड़कर दोस्त बनाते हैं और अकेलापन को दूर भगाने में ये काफी अच्छा विकल्प साबित होता है।

निराशा

इस समय कई लोगों की नौकरी चली गई, जो लोग बिजनेस करते थें उनको घाटा हो रहा है जिसकी वजह से लोगों के मन में निराशा आना वाजिब है। इसके अलावा कई बार ऐसा भी होता है कि कुछ लोग परीक्षाओं में असफलता मिलने पर व्यक्ति निराशा से भर जाता है। उसकी सोच भी नकारात्मक हो जाती है और धीरे-धीरे उसका मनोबल भी बैठ जाता है।

कुछ लोग अपनी आर्थिक स्थिति के कारण निराश होते हैं तो कई लोग परीक्षा में अच्छे नंबर ना लाने से या किसी प्रवेश परीक्षा में असफल होने, मनपसंद नौकरी न मिलने, अधुरे प्यार, पारिवारिक समस्याओं से निराश हो जाते हैं। पर हर निराश व्यक्ति को यह अवश्य पता करना चाहिए कि उसकी निराशा का मुख्य कारण क्या है। जीवन में व्यक्ति बहुत से अवसर पर निराश हो सकता है।

लॉकडाउन में निराशा से कैसे निकले बाहर

१. सबसे पहले तो आपको निराशा से बाहर निकलने के लिए अपनी सोच में बदलाव करना पड़ेगा। क्योंकि ये आपके दिमाग में बार बार नकारात्मक विचारों को लाता है जो आपके अंदर मौजूद प्रतिभा को भी खत्म कर देता है।

२. ध्यान रहे कि जिस बात से निराशा हो उसे बिल्कुल याद न करें, क्श्सेंकि जब हम सकारात्मक होकर सोचते हैं तो देखते हैं कि उन बातों का कोई मतलब ही नहीं था। उन बातों को भूलने से हमारे दिमाग से एक बोझ सा उतर जाता है, जिससे हम रिलैक्स महसूस करते हैं।

३. कोशिश करें कि लोगों को माफ करने की आदत अपने अंदर लाएं। यानि अगर आपके साथ कोई धोखा, नुकसान , भरोसे तोड़ता है तो आप उस बात को लेकर दुखी होने की बजाय उसे माफ कर दें।

४. इसके अलावा निराशा से बाहर निकलने के लिए अपनी पसंद के गाने सुनें, अपनी पसंद की मूवी देखें, कॉमेडी मूवी देखें।

५. जितना हो सके खुद को बीजी रखें ऐसा करने से आप अकेले नहीं रहेंगे क्योंकि अकेले में सबसे ज्यादा नकारात्मक विचार आते हैं।

अगर आप किसी भी तरह की मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं तो आप विनीता एम. हरिया से मदद ले सकते हैं, ये एक प्रमाणित मनोवैज्ञानिक है। इनके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।

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