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पॉलिटिकल जर्नलिज्म: युवाओं के लिए बेहतरीन करियर विकल्प (Political Journalism is The Best Career Option For Youth)

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पॉलिटिकल जर्नलिज्म

‘जर्नलिज्म’ जिसे हिंदी में पत्रकारिता या फिर मास कम्यूनिकेशन भी कहते हैं। समय के साथ साथ अब इस क्षेत्र में भी काफी बदलाव आया है, नई-नई तकनीकों के कारण अब पत्रकारिता के कई प्लेटफॉर्म देखने को मिल रहे हैं। प्रिंट, रेडियो, टीवी के बाद पत्रकारिता का एक नया रूप संवरकर सामने आया है और वो रहा है वेब का। अगर आपको भी देश दुनिया की खबरों में दिलचस्पी है और आगे आप भी इस क्षेत्र में कुछ बेहतर करना चाहते हैं तो इस फील्ड में आ सकते हैं। वहीं राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए पॉलिटिकल जर्नलिज्म भी है।

क्या है जर्नलिज्म?

जर्नलिज्म का क्षेत्र काफी ज्यादा व्यापक है, अधिकतर लोगों का मानना है कि जर्नलिज्म का संबंध केवल पॉलिटिक्स से होता है। लेकिन ऐसा नहीं है जर्नलिज्म लेखन का एक ऐसा रूप है जिसमें लोगों को उनके आस-पास और देश-विदेश या फिर, पूरे विश्व में होने वाली उन प्रमुख घटनाओं की जानकारी देते हैं क्योंकि लोग इसके बारे में पहले से शायद कुछ भी नहीं जानते हैं। जर्नलिज्म में आने वाले लोगों को जर्नलिस्ट कहते हैं। ये पेशेवर न्यूज़पेपर्स, मैगज़ीन्स, वेबसाइट्स या टीवी/ रेडियो स्टेशन में जॉब्स करते हैं या उक्त के लिए फ्रीलांसिंग करते हैं।

पॉलिटिकल जर्नलिज्म क्या है?

हालांकि जर्नलिज्म के कई क्षेत्र है लेकिन हम बात करेंगे पॉलिटिकल जर्नलिज्म की, जो कि एक मुख्य शाखा के रूप में जाना जाता है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पॉलिटिक्स में पॉलिटिकल साइंस के सभी पहलूओं को शामिल किया गया होता है जैसे कि राज्य, देश विदेश की सिविल सरकारों या फिर किसी भी तरह के पॉलिटिकल घटनाक्रम को इसके अंतर्गत ही देखा जाता है।

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पॉलिटिकल जर्नलिज्म का लक्ष्य मतदाताओं को विभिन्न स्थानीय और राज्य/ राष्ट्रीय मामलों के बारे में जानकारी और सूचना प्रदान करना होता है ताकि जनता-जनार्दन को निरंतर पॉलिटिकल इवेंट्स की लेटेस्ट जानकारी मिलती रहे। शायद ये बात काफी कम लोगों को पता होगा लकिन पॉलिटिकल जर्नलिज्म के अंतर्गत इलेक्ट्रोरल जर्नलिज्म और मिलिट्री जर्नलिज्म को भी शामिल किया जाता है। अगर इसे आसान शब्दों में समझना है तो एक तरह से ये जान लें कि पॉलिटिकल जर्नलिज्म सबसे लोकप्रिय जर्नलिज्म है। प्रिंट हो या फिर रेडियो या डिजिटल मीडिया हर जगह पॉलिटिकल जर्नलिज्म का क्रेज छाया हुआ है।

यह जर्नलिज्म का एक ऐसा ब्रांच है जिसमें नेशनल और इंटरनेशनल पॉलिटिक्स के सभी पहलू कवर किये जाते हैं। इस फील्ड का मुख्य लक्ष्य वोटर्स को सरकार से संबद्ध उन सभी मामलों या मुद्दों के बारे में अपनी राय कायम करने के लिए जानकारी उपलब्ध करवाना होता है जिन मामलों का उन वोटर्स पर असर पड़ सकता है। कुछ मशहूर पोलिटिकल जर्नलिस्ट्स के तौर पर रवीश कुमार, करन थापर, अर्नब गोस्वामी, गौरी लंकेश, एन. राम, सुधीर चौधरी, तवलीन सिंह, ये सभी वर्तमान समय के जाने माने पॉलिटिकल जर्नलिस्ट्स हैं।

पॉलिटिकल जर्नलिज्म के लिए ये गुण हैं जरूरी

इसके लिए आपको किसी अच्छे जर्नलिज्म इंस्टीट्यूट से जर्नलिज्म में बैचलर डिग्री प्राप्त करनी होगी।

इसके अलावा किसी न्यूज़पेपर, मैगज़ीन या मीडिया कंपनी में इंटर्नशिप करना होगा ।

वहीं हो सके तो आपको किसी प्राइवेट न्यूज़ एजेंसी/ चैनल से वर्क एक्सपीरियंस भी लेना चाहिए जो आपके उज्जवल भविष्य में मदद करेगा।

आप अपना इम्प्रेसिव प्रोफाइल तैयार करें, यह जॉब में आपकी मदद करेगा।

अपनी राइटिंग स्किल्स को निखारें। हो सके तो अपनी फील्ड के रिपोर्टर्स और एडिटर्स से संपर्क कायम करें और अच्छे पेशेवर संबंध बनाएं।

सोशल मीडिया पर अपना पर्सनल ब्रांड बनाएं जो आपको पॉलिटिकल जर्नलिज्म में आगे काफी मदद कर सकता है। मल्टी टैलेंटेंड लोगों की इसमें काफी पूछ है।

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टॉप इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ जर्नलिज्म

·इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी)
·एजे किदवई मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर (एजेकेएमसीआरसी)
·सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ़ मास कम्युनिकेशन
·एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज्म
·इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड न्यू मीडिया, बैंगलोर (आईआईजेएनएम)

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जर्नलिस्ट्स का सैलरी पैकेज

हालांकि भारतीय मीडिया को देखा जाए तो यहां एक जर्नलिस्ट की एवरेज सैलरी शुरू में रु. 2.6 लाख प्रति वर्ष होती है लेकिन जैसे जैसे उन्हें इस क्षेत्र में अनुभव होते जाता है वैसे वैसे उनकी सैलरी भी बढ़ती ही जाती है। इनका सैलरी बेंड रु. 1 लाख से रु. 8 लाख प्रति वर्ष है। इस क्षेत्र में अपने करियर के लगभग 20 वर्ष पूरे करने के बाद जर्नलिस्ट अन्य पेशे अपना लेते हैं क्योंकि इतने लंबे कार्य-अनुभव के बाद उनका टैलेंट और वर्क स्किल्स तो काफी बढ़ जाते हैं लेकिन सैलरी पैकेज उसके मुताबिक नहीं बढ़ता है।

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