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‘प्लाज्मा थेरपी’ के प्रयोग से कोविड-19 के मरीजों को मिल रही है राहत, जानिए कैसे?

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कोरोना वायरस की अभी तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं की गई है. हालाँकि इस वैश्विक महामारी का तोड़ निकालने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक इसका टीका (वैक्सीन) बनाने में जुटे हुए है. इसी बीच एक राहत की भी खबर है. रिपोर्ट के अनुसार ‘प्लाज्मा थेरपी’ के प्रयोग से कोविड-19 के मरीजों में राहत देखने को मिल रही. 

प्लाज्मा थेरपी में स्वस्थ्य व्यक्ति के प्लाज्मा से बीमार का इलाज किया जाता है. यह थेरपी १०० साल से भी अधिक पुरानी है. चीन, अमेरिका, इंग्लेंड जैसे कई देशों में कोरोना से जंग जीत चुके लोगों का प्लाज्मा इकट्ठा करके इलाज हो रहे मरीजों को चढ़ा रहे है. अच्छी खबर यह है कि  इससे कोविड-19 के मरीजों में राहत देखने को मिल रही है. अब भारत में भी इस थेरेपी से इलाज का ट्रायल शुरु किया जा रहा .रिपोर्ट्स के अनुसार केरल देश का पहला ऐसा राज्य होगा जो कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी का क्लीनिकल ट्रायल जल्दी ही शुरू करेगा.

प्लाज्मा थेरपी क्या है और यह कोविड-19 के इलाज में कैसे है कारगर 

प्लाज्मा थेरेपी एक बहुत पुरानी तकनीक है. इसमें स्वस्थ लोगों के रक्त से प्लाज्मा निकालकर बीमार रोगियों को चढ़ाया जाता है.विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी प्लाज्मा थेरेपी को बेहतर माना है. WHO के हेल्थ इमरजेंसी प्रोग्राम के हेड डॉक्टर माइक रेयान ने कहा है कि इस दिशा में काम किया जाना चाहिए। डॉक्टर माइक का मानना है कि हाइपरिम्यून ग्लोब्युलिन रोगियों में एंटीबॉडी को बेहतर बनाता है, जो मरीजों की स्थिति को बेहतर करता है। इसका इस्तेमाल सही वक्त पर किया जाना चाहिए। यह वायरस को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही इससे मरीज का प्रतिरक्षा तंत्र बेहतर होता है। यह रोगियों के शरीर को कोरोना वायरस से लड़ने में बेहतर होता है। जरूरी है कि इसे सही वक्त पर किया जाना चाहिए। प्लाज्मा थेरेपी हर बार सफल हो यह जरूरी नहीं है।

कैसे काम करती है कैसे काम करती है एंटीबॉडी:

ऐंटीबॉडीज व्यक्ति के शरीर में उस समय बनना शुरू होती हैं, जब वायरस उसके शरीर पर हमला करता है. एंटीबॉडीज वायरस पर अटैक करती हैं और उसे डिऐक्टिवेट करने का काम करती है. कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे डॉक्टर्स के अमुसार जब मरीज कोविड-19 से लड़कर ठीक हो जाता है तब भी उसके शरीर में ब्लड के अंदर ये ऐंटीबॉडीज काफी लंबे समय तक प्रवाहित होती रहती है. ऐसे में ठीक हो गए व्यक्ति के शरीर से एंटीबॉडीज को मरीज के शरीर में उन ऐंटिबॉडीज को इंजेक्ट किया जा ता है, जो उनके शरीर में जो इम्यूनिटी डेवलप करने का काम करता है.

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