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ज्योतिष: ग्रह चंद्रमा और भावनाएं एक दूसरे से कैसे हैं संबंधित ?

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Planet moon and emotions

ज्योतिष शास्त्र एक ऐसी धारा है जो व्यक्ति, प्रकृति और सार्वभौमिक आवृत्ति को एकसाथ बांधकर रखता है। कहते हैं की मनुष्य और ज्योतिष का जुड़ाव काफी गहरा है। ग्रहों व सितारों की चाल पर ही ज्योतिष विद्या का निर्भर होता है पर क्या आपको पता है कि अन्य सभी ग्रहों की तुलना में मनुष्य के सबसे करीब चंद्रमा है। जी हां यही कारण है कि भारतीय वैदिक ज्योतिष में चन्द्रमा को काफी ज्यादा महत्त्व दिया जाता है क्योंकि यह व्यक्ति के जन्म से लेकर विवाह व मृत्यु आदि कई क्षेत्रों के बारे में जानने के लिए कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति का गहराई से अध्ययन करना आवश्यक माना जाता है।

वैसे देखा जाए तो चन्द्रमा ग्रह का मनुष्य के सबसे करीब होने का एक कारण यह भी हो सकता है कि ये पृथ्वी के सबसे नजदीक भी है। ज्योतिष की मानें तो हर ग्रह हमारे जीवन के किसी न किसी पहलू को उजागर करता है और उसके बाद अच्छे और बुरे दोनों तरीकों से हमें प्रभावित करता है। इसी तरह हमारे जीवन में चन्द्रमा की भी एक बेहद ही महत्वपूर्ण भुमिका होती है, इसलिए आज हम आपको इसके बारे में विशेष जानकारी देने जा रहे हैं।

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मन का कारक है चंद्रमा

शास्त्रों की मानें तो चन्द्रमा व्यक्ति के मन, भावना व व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। ये सभी हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं इनके बिना कुछ भी संभव नहीं हो पाता है। हमारी भावनाओं के अनुसार ही हमारा मन व शरीर कार्य करता है और किसी भी फैसले पर निर्णय लेने में मदद करता है। कई बार ऐसा होता है कि हम अपने भावनाओं को इग्नौर कर देते हैं पर फिर भी कुछ समय बाद वो अपनी तरफ हमें खींच ही लेता है। इसका असर नकारात्मक व सकारात्मक दोनों तरह से हो सकता है। कहने का अर्थ है कि अस्थायी व स्थायी दोनों ही भावनाएं चन्द्रमा ग्रह पर ही निर्भर होती हैं। आप सोच रहे होंगे कि भला ये कैसे हो सकता है ?

तो इसका जवाब भी ज्योतिष शास्त्र में दिया गया है, जिसमें बताया गया है कि चन्द्रमा का अलग अलग ग्रहों के साथ इसका सम्बन्ध होने पर भावनाओं का अलग अलग रूप हो जाता है। चन्द्रमा का प्रभाव जन्मकुंडली के विभिन्न भाव में भिन्न भिन्न रूप में पड़ता है। चन्द्रमा का तत्व जल होता है, इसलिए इस ग्रह की प्रकृति ठंडी है। ज्योतिष की गणनाओं के लिए चंद्रमा को स्त्री ग्रह माना जाता है। ज्योतिष में चन्द्रमा निम्न विषयों का कारक होता है मन, जल, गर्भाधान, शिशु अवस्था, व्यवहार, उत्तर पश्चिम दिशा, माता, दूध, और मानसिक शांति, विदेश यात्रा इत्यादि का कारक है।

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चंद्रमा ग्रह व उसके लक्षण

चन्द्रमा का अपना घर कर्क राशि है तथा वृष राशि में चन्द्रमा उच्च का होता है। वृष व कर्क राशि में चन्द्रमा स्थित होने पर बलवान हो जाते हैं जो कि चन्द्रमा की अपनी राशि है। अगर जन्म कुण्डली में चन्द्रमा मजबूत हो तो व्यक्ति सभी कामों में सफलता प्राप्त करता है और हमेशा उसका मन प्रसन्न रहता है। पद प्राप्ति व पदोन्नति, जलोत्पन्न, तरल व श्वेत पदार्थों के कारोबार से लाभ मिलता है।

ऐसे लोगों को आमतौर पर अपने जीवन में सुख-सुविधाएं प्राप्त करने के लिए अधिक प्रयास नहीं करने पड़ते तथा इन्हें बिना प्रयासों के ही सुख-सुविधाएं ठीक उसी प्रकार प्राप्त होती रहतीं हैं। इतना ही नहीं जब भी चंद्रमा प्रभावित होता है तो उसका असर हमारी भावनाओं पर सीधा पड़ता है, जैसे कि सकारात्मक चन्द्रमा मन की शांति, खुशी और उत्साह को दर्शाता है तो वहीं दूसरी ओर नकारात्मक चंद्रमा नकारात्मक भावनाओं को उत्पन्न करता है जैसे ये व्यक्ति के तनाव का कारण व उसे निराशावादी भी बनाता है।

ज्योतिष में मेघराज भारद्वाज को विशेष अनुभव प्राप्त है। ज्योतिष के क्षेत्र में 15 सालों से कार्यरत मेघराज भारद्वाज से आप अपनी समस्याओं पर परामर्श लेने के लिए संपर्क कर सकते हैं।

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