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प्रकृति का वरदान माना जाता है नेचुरोपैथी, इन रोगों में है कारगर

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नेचुरोपैथी

मानव शरीर खुद रोगों से लडऩे में सक्षम होता है बस विधि का ज्ञान होना चाहिए। संसाधनों से समृद्ध प्रकृति से निकटता के जरिए आप सेहतमंद बने रह सकते हैं। तभी तो तनाव होने पर डॉक्टर भी कहीं दूर नेचुरल जगहों पर घूमने की सलाह देते हैं। दरअसल आज हम बात करने वाले नेचुरोपैथी की जिसे प्राकृतिक चिकित्सा भी कहा जाता है। हालांकी इसके बारे में आज के आधुनिक जमाने मे काफी कम लोग जानते हैं लेकिन ये सच है कि चिकित्सा के क्षेत्र में ये प्राचीन विधियों में से एक हैं।

क्या है नेचुरोपैथी

नेचुरोपैथी या प्राकृतिक चिकित्सा, जो कि एक ऐसी अनूठी प्रणाली है जिसमें जीवन के शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक तलों के रचनात्मक सिद्धांतों के साथ व्यक्ति के सद्भाव का निर्माण होता है। इसमें स्वास्थ्य के प्रोत्साहन, रोग निवारक और उपचारात्मक के साथ-साथ फिर से मज़बूती प्रदान करने की भी अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक चिकित्सा उपचार की एक ऐसी प्रणाली है जो शरीर के भीतर महत्वपूर्ण उपचारात्मक शक्ति के अस्तित्व को मान्यता देती है। अतः यह मानव प्रणाली से रोगों के कारण दूर करने के लिए अर्थात रोग ठीक करने के लिए मानव शरीर से अवांछित और अप्रयुक्त मामलों को बाहर निकालकर विषाक्त पदार्थों को निकालकर मानव प्रणाली की सहायता की वकालत करती है।

नेचुरोपैथी में ऐसे होता है उपचार

अब इतना कुछ जानने के बाद आपके मन में ये सवाल जरूर आ रहा होगा कि इस विधि में उपचार की कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाती है यानि कैसे उपचार किया जाता है? मड बाथ, मिट्टी की पट्टी, वेट शीट पैक (गीली चादर लपेट), हॉट आर्म एंड फुट बाथ (गर्म पाद स्नान), सन बाथ (सूर्य स्नान), कटि स्नान, स्टीम बाथ, एनीमा, स्पाइन स्प्रे बाथ, मॉर्निंग वॉक, जॉगिंग के अलावा उपवास, दूध कल्प, फलाहार, रसाहार, जलाहार द्वारा भी इलाज किया जाता है।

घर पर रखकर भी कर सकते हैं इलाज

नेचुरोपैथी चिकित्सक का कहना है कि जुकाम, खांसी, उल्टी, दस्त जैसे रोगों में तीन दिन तक तरल पदार्थ व एनीमा द्वारा इलाज करते हैं।

वहीं अगर आपको दस्त हुआ है तो मिट्टी रात भर पानी में भिगोकर सवेरे मरीज की नाभि से चार अंगुल की दूरी पर चारों ओर एक-डेढ़ इंच मोटा लेप लगा दिया जाता है फिर इसे आधे घंटे बाद हटा दिया जाता है।

अगर घुटने के दर्द में मिट्टी को गर्म पानी में मिलाकर लेप लगाएं। जल चिकित्सा में दर्द व सूजन वाली जगहों पर तौलिये को गर्म पानी में भिगोकर रोग ग्रस्त जगह पर रखने से आराम मिलता है।

खास बात तो यह हैं कि डिप्रेशन या रीढ़ संबंधी रोगों में को भी इस विधि से दूर किया जा सकता है, इसके लिए ठंडा या गर्म रीढ़ स्नान दिया जाता है।

वहीं बात करें मधुमेह रोगियों की तो उन्हें हिप बाथ दी जाती है। इसके अलावा अन्य कई रोगों को दूर करने की क्षमता नैचुरोपथी में हैं।

नेचुरोपैथ चिकित्सक से संपर्क करने के लिए यहां क्लिक करें

नेचुरोपैथी का लाभ आप भी उठाना चाहते हैं, या फिर इसके बारे में विस्तृत रूप से सुझाव लेना चाहते हैं तो हमारे नेटवर्क पर मौजूद डॉ. टोकिका येप्थोमी आपकी मदद कर सकते हैं। इनसे संपर्क करने के लिए यहां क्लिक करें।

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