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शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है मानसिक रूप से स्वस्थ्य होना

  • द्वारा
clinical psychologist

आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति तनावग्रस्त है, ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इस आधुनिक दुनिया में जितने साधन बढ़ते जा रहे हैं उतना ही दबाव भी बढ़ते जा रहा है। हर व्यक्ति किसी न किसी तरह के दबाव से घिरा ही रहता है। ऐसे में जब भी किसी को ऐसा लगता है कि वो अब ये मानसिक तनाव को झेल नहीं सकता तो ऐसे में अपने बढ़ते तनाव को दूर करने व सुखद जीवन व्यतीत करने के लिए वो मनोवैज्ञानिकों का सहारा लेता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यही एक ऐसा विज्ञान है जो बिना दवाइयों का प्रयोग किए लोगों की सोच में परिवर्तन ला सकता है।

मनोविज्ञान का अर्थ होता है ‘आत्मा का अध्ययन’ और इसे अध्ययन करने वाले को मनोवैज्ञानिक कहा जाता है। इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि मनोविज्ञान एक ऐसा क्षेत्र है जो हमारे मन को विज्ञान के नियमों के जरिए समझता है। पिछले कुछ समय से लोगों का मनोविज्ञान के प्रति विश्वास काफी बढ़ गया है, हो भी क्यों न भला हर कोई विज्ञान को मानने और समझने लगा है इसलिए मानसिक स्थिति के लिए भी विज्ञान का सहारा लेना वाजिब है।

मनोवैज्ञानिक अब सिर्फ मानसिक रूप से असंतुलित लोगों का ही इलाज नहीं करते बल्कि इसका क्षेत्र भी व्यापक होते जा रहा है। ये जीवन से जुड़ी हर समस्याओं का समाधान निकालते हैं जैसे बिगड़ते रिश्तों का, तेजी से तरक्की की लालसा तथा बढ़ती आत्महत्याओं को कम करने में भी इनका अहम योगदान होता है। यही वजह है कि जैसे जैसे समय बीत रहा है वैसे वैसे मनोवैज्ञानिकों की मांग बढ़ती ही जा रही है। अगर आप चाहें तो इस क्षेत्र में भी अपना उज्ज्वल भविष्य देख सकते हैं।

मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करते हैं मनोविज्ञान

इन मानसिक स्थिति को पढ़ने व जानने के लिए पढ़ाई करनी होती है और वो है मनोविज्ञान की। इस दौरान मनोवैज्ञानिक ये सीखते हैं कि कैसे वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग कर उन कारकों का अध्ययन किया जाए जो व्यक्ति के विचारों, नज़रियों, भावनाओं और कार्यों पर असर डालते हैं। मनोवैज्ञानिक अपने कौशल का प्रयोग उन लोगों के साथ काम कर पाते हैं जो मानसिक विकारों से जूझ रहे हैं, जैसे चिंता, घबराहट, भोजन का विकार, दहशत, डर का विकार, नशे की लत आदि।

खास बात तो यह है कि मनोविज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति को धैर्यवान, मिलनसार होना बेहद जरूरी हो जाता है, क्योंकि इन सभी गुणों को अपने अंदर रखने के बाद ही कोई भी व्यक्ति सफल मनोवैज्ञानिक बन पाता है। अपने अंदर मौजूद इन गुणों के आधार पर वो अवसाद या तनाव से घिरे व्यक्तियों की दिक्कतों को समझ पाएगा और उसका उपचार कर पाएगा। इन सबके साथ एक मनोवैज्ञानिक को सामने वाले व्यक्ति की बात और परेशानी समझने और अपनी बात उसे समझाने की क्षमता होनी चाहिए।

इन सभी गुणों से भरपूर हमारे नेटवर्क से जुड़ी एक प्रमाणित क्लीनिकल मनोवैज्ञानिकों हैं जिनका नाम है रीमा शाह। ये आपकी मनोविकार संबंधी समस्याओं को काफी हद तक सुलझा सकती हैं। रीमा को इसमें 20 वर्षों से भी अधिक का अनुभव है। वो बच्चों और वयस्कों को विभिन्न व्यवहार, भावनात्मक और मनोदशा संबंधी मुद्दों के लिए परामर्श दे सकती हैं। रीमा का मानना है कि हमें अपनी मानसिक समस्याओं पर काम करना अत्यंत जरूरी है, इसमें शर्म की कोई बात नहीं होनी चाहिए। जिस तरह से हम अपनी शारीरिक बीमारियों के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं, ठीक उसी तरह हम अपने भावनात्मक मुद्दों के लिए भी एक चिकित्सक के पास जा सकते हैं।

रीमा आपको अपने इस सत्र में चिंता और अवसाद से लड़ने में मदद करेगी। वहीं वो इस पूरे समय में आपकी सहेली बनकर आपके मन को शांत व सही मार्गदर्शन भी कराएंगी। समस्या का पता लगाना और विभिन्न परामर्श तकनीकों के जरिए व्यवहार के अधिक उपयोगी पैटर्न में बदलना। बच्चों की काउंसिलिंग और मार्गदर्शन, इस प्रतिस्पर्धी दुनिया में बच्चों को खुद पर विश्वास करने में मदद करता है।

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