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मेहन्दीपुर बालाजी मंदिर: आस्था, रहस्य और चमत्कार देखकर नास्तिक भी बन जाते हैं आस्तिक

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हमारे देश में ऐसे कई मंदिर और धार्मिक स्थल हैं जिन्हे अपने चमत्कार के लिए जाता है. इन्हीं मंदिरों में से एक है मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर. भक्तजनों में यह मंदिर अपनी आस्था के साथ साथ अलौकिक रहस्यों के लिए भी जाना जाता है. भगवान बजरंबली का यह अनोखा मंदिर जयपुर की सीमा रेखा से सटे दौसा जिले के मेंहदीपुर कस्बे में में स्थित है.

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के बारे में ऐसी लोकधारणा है कि नास्तिक से नास्तिक व्यक्ति भी बालाजी मंदिर के अलौकिक चमत्कार देखकर आस्तिक बन जाता है. इस मंदिर में काली छायी और प्रेत बाधा से मुक्ति पाने के लिए लोग पहुंचते हैं. यह भी कहा जाता है कि यहां प्रेतात्मा को शरीर से मुक्त करने के लिए उसे कठोर से कठोर दंड दिया जाता है. इसे देखकर एक बार ज़रूर डर का अहसास होता है लेकिन इस मंदिर की ख़ासियत यही हैं कि हनुमान जी के मनोहर बाल रूप देखकर श्रद्धालु भयमुक्त हो जाते हैं

दो पहाडियो के बीच बालाजी के इस चमत्कारिक मंदिर को घाटे वाले बालाजी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर में हनुमान जी बाल रूप में विराजमान हैं. यही नही इस मंदिर से जुड़ी कुछ रहस्मयी विशेषताएं भी है जिसकी वजह से यहाँ दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल का विषय बना रहता है .

मेहंदीपुर बालाजी की छाती पर बायीं ओर एक छोटा छिद्र है. जिसमें से जल बहता रहता है. ऐसी मान्यता है कि यह बालाजी का पसीन है. यह अलौकिक मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है और ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में स्थित बजरंग बली की बालरूप मूर्ति किसी कलाकार ने नहीं बनाई बल्कि यह स्वंयभू है यानी बजरंग बलि खुद यहाँ प्रगट हुए थे. इस मंदिर में तीन देवता विराजते हैं एक तो स्वयं बालाजी, दूसरे प्रेतराज और तीसरे भैरों बाबा जिन्हें काशी का कोतवाल या कप्तान भी कहा जाता.

इस मंदिर से जुड़ी एक धार्मिक कथा भी है जिसके अनुसार प्रारंभ मंदिर के स्थाना पर बीहड़ जंगल था. श्री मंहत जी महाराज के पूर्वज गोसाई जी को हनुमान जी का स्वप्न आया और स्वप्न में उन्होने इस पवित्र जगहा के दर्शन कराए. गोसाई जी स्वप्न अवस्था में ही उठ कर चल दिए. तभी एक विचित्र लीला घटित हुई. गोसाई जी देखते हैं कि हजारों की संख्या में दीपक टिमटिमाते चले आ रहें हैं. साथ ही हाथी घोड़ों से सजी एक बहुत बड़ी फौज चली आ रही है. उस फौज ने श्री बालाजी महाराज की मूर्ति की तीन प्रदक्षिणाएं की और फौज के सेनापति ने नीचे उतरकर श्री बालाजी महाराज को दण्डवत प्रणाम किया तथा जिस रास्ते वे आए उसी रास्ते लौट गये.

गोसाई जी महाराज चकित होकर यह सब देखते ही रह है. उन्हें कुछ डर सा लगा और वे वापस अपने गांव चले गए किन्तु नींद नहीं आई और बार-बार उसी विषय पर विचार करते हुए उनकी जैसे ही आँखें लगी उन्हें स्वप्न में तीन मूर्तिया दिखी. उनके कानों में यह आवाज आई – “उठो, मेरी सेवा का भार ग्रहण करो. मैं अपनी लीलाओं का विस्तार करूंगा“ यह बात कोई और नही स्वयम् हनुमान जी आदेश रूप में दे रहे थे. हालाँकि गोसाई जी ने फिर इस बात को स्वप्न समझकर ध्यान नहीं दिया और अन्त में हनुमान जी महाराज ने स्वंय उन्हें दर्शन दिए और पूजा का आग्रह किया.

दूसरे दिन गोसाई जी महाराज उस मूर्ति के पास पहुंचे तो उन्होंने देखा कि चारो ओर से घंटा-घड़ियाल और नगाड़ों की आवाज आ रही है, किन्तु दिखाई कुछ नहीं दिया. इसके बाद श्री गोसाई जी ने आस-पास के लोग इकट्ठे किए और सारी बातें उन्हें बताई. गोसाई जी ने सब लोगों के साथ मिलकर वहां बालाजी महाराज की एक छोटी सी प्रतिमा बना दी, तत्पश्चात वहाँ पूजा-अर्चना होने लगी.

इस मंदिर से जुड़ी एक कथा बड़ी ही रोचक है. मान्यता है कि मुस्लिम शासनकाल में कुछ बादशाहों ने इस मूर्ति को नष्ट करने का प्रयास बहुत प्रयास किया. लेकिन यह प्रभु की लीला ही थी कि हर बार ये बादशाह असफ़ल इसे जितना खुदवाते मूर्ति की जड़ उतनी ही गहरी होती चली जाती. अंतत: थक हार कर उन्हें अपना यह कुप्रयास छोड़ना पड़ा.

हालाँकि मेंहदीपुर बाला जी के दर्शन करने के लिए कुछ कड़े नियम भी है. जिसके अंतर्गत यहां आने से कम से कम एक सप्ताह पहले लहसुन, प्याज, अण्डा, मांस, शराब का सेवन बंद करना वर्जित होता है. साथ ही मंदिर से जुड़ी एक धारणा और भी है अपने देखा होगा आमतौर पर मंदिर में भगवान के दर्शन करने के बाद लोग प्रसाद लेकर घर आते हैं लेकिन ऐसा कहा जाता है कि मेंहदीपुर बालाजी मंदिर से भूलकर भी प्रसाद को घर नही ले जाना चाहिए मान्यता है कि ऐसा करने से आपके ऊपर प्रेत साया आ सकता है. यहां पर चढ़ने वाले प्रसाद को दर्खावस्त और अर्जी कहते हैं

मेहंदीपुर में हर प्रकार की समस्या का समाधान मिल जाता है. फिर भूत-प्रेत की बाधा हो या कोई बीमारी. आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन बालाजी के दरबार में भक्त पागलपन, मिर्गी, लकवा, और टी.बी जैसी बीमारियों के समाधान के लिए भी आते हैं और कमाल ये कि श्री बालाजी महाराज की कृपा से उनका ये संकट भी शीघ्र टल जाता है.

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