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‘काबासूरा कुडिनीर’ कर सकता है कोरोना संक्रमण से बचाव (Kabasura Kudinir can prevent corona infection)

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काबासूरा कुडिनीर

दुनियाभर में कोरोना वायरस ने कोहराम मचा रखा है, मार्च से लगे लॉकडाउन से लोग अब ऊब गए है। हर कोई इसके इलाज की खबर सुनने को तरस रहा है। इस महामारी ने लोगों को घरों से निकलना तो बंद कर ही दिया इसके साथ ही साथ मन में डर भी हो गया है कि कब इसका शिकार कौन हो जाए कुछ पता नहीं चल रहा। इस बीच काबासूरा कुडिनीर लोगों के लिए एक उम्मीद बनकर सामने आया है।

हालांकि दुनियाभर के देश इस घातक कोरोना वायरस के लिए इलाज ढूंढने में लगे हैं कई देशों के वैक्सीन ट्रायल पर भी है जिसमें से कुछ के सफलता की गुंजाईश नजर भी आ रही लेकिन इसी बीच एक अच्छी खबर सामने आई है जिसे पढ़कर लोगों को राहत मिल रही है।

काबासूरा कुडिनीर द्वारा कोरोना का इलाज

जहां कोरोना वायरस के इलाज में लगे वैश्विक प्रयास में एक प्रयास तमिलनाडु में स्थित पारंपरिक चिकित्सा पद्धति सिद्ध के डॉक्टरों की टीम ने भी किया है, जिसमें कोरोना मामलों के प्रबंधन में ‘काबासूरा कुडिनीर’ को प्रभावी पाया है। दरअसल सिद्ध में कम से कम दो अनुसंधान पत्रों ने सह दावा किया है कि जड़ी-बूटी काबासूरा कुडिनीर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने में कारगर है।

हालांकि यह बात तो आपको भी पता होगा कि जब से कोरोना वायरस ने प्रभाव दिखाना शुरू किया तभी से विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक काढ़ा पीने की सलाह दी है जिसकी वजह से आप अपने अंदर के इम्यूनिटी पावर बढ़ा सकें। यही नहीं अभी कुछ ही समय पहले अगर आपको याद होगा तो रामदेव बाबा के संस्थान पतंजलि ने भी कोरोना वायरस के दवा बनाने का दावा किया था, हालांकि बाद में आईसीएमआर ने यह मानने से इंकार किया कि यह दवा कोरोना को खत्म करने में कारगर है।

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क्या है काबासूरा कुडिनीर?

अब आप ये सोच रहे होंगे कि काबासूरा कुडिनीर आखिर क्या है? यह कोरोना से बचाने में हमारी मदद कैसे कर सकता है? तो बता दें कि काबासूरा कुडिनीर औषधीय काढ़ा है जिसे बनाने के लिए उसमें अदरक, पिपली, लौंग, सिरुकनकोरी की जड़, मूली की जड़ें, कदुक्कई, आजवाइन और कई जड़ी-बूटियां सूखे रूप में शामिल किया गया है।

इसे बनाने के लिए ये सभी सामग्रियों को चूरा बनाकर पानी के साथ मिलाया जाता है फिर इसे तब तक उबाला जाता है जब तक कि वह एक चौथाई न रह जाए। जब से यह जानकारी तमिलनाडु सरकार को हुआ है तभी से वो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इसके उपयोग को बढ़ावा दे रही है। हालांकि इसके साथ ही तमिलनाडु सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कोविड-19 के मरीज के इलाज के लिए कोई दवा नहीं है।

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कैसे पता चला काबासूरा कुडिनीर है कारगर ?

काबासूरा कुडिनीर के बारे में तब पता चला जब वेल्लोर में कोविड-19 की जांच में संक्रमित पाए गए 84 लोगों के दो समूहों पर इसका रिसर्च किया गया। इस शोध को करने के लिए इन मरीजों को यह काढ़ा दिया गया जिसके कारण मिलने वाले संरक्षण तथा उच्च जोखिम वाले कोविड-19 मामलों में इसके रोग निरोधी प्रभाव के प्रारंभिक साक्ष्य के तौर पर लिया जा सकता है।

त्रिरुपत्तूर जिले के सहायक चिकित्सा अधिकारी (सिद्ध) डॉ वी विक्रम कुमार, ने बताया कि तमाम वरिष्ट अधिकारियों के देखरेख व सहमति से यह शोध अप्रैल माह में किया गया था। जिसमें पाया गया कि जिन लोगों के काबासूरा कुडिनीर का सेवन किया था वे छह अप्रैल को कोविड-19 की जांच में नेगेटिव पाए गए जबकि जिन्हें यह औषधीय काढ़ा नहीं दिया गया था वे जांच में संक्रमित पाए गए। अध्ययन के मुताबिक काढ़ा पीने और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के बीच संबंध देखा गया।

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आयुर्वेद व कोरोना

शुरू से ही कोरोना से लड़ने के लिए लोग आयुर्वेद को अपनाते आए है लेकिन अब इस शोध से यह तो तय हो गया कि आयुर्वेद में कोरोना से लड़ने की क्षमता है। तभी तो आयुष मंत्रालय ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के साथ मिलकर कोरोना वायरस से लड़ने के लिए 4 महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के क्लिनिकल ट्रायल शुरू किए हैं। ये दवाएं हैं- अश्वगंधा, गुडूची, यष्टिमधु और पीपली। हालांकि ये भी सच है कि कोरोना के इलाज के लिए वैसे तो कई आयुर्वेदिक दवाओं के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी के आधिकारिक तौर पर पर पुष्टि नहीं हुई है।

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