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व्रत में खाया जाने वाला साबूदाना शाकाहारी है या मांसाहारी है?(Is the sago eaten in the fast vegetarian or non-vegetarian?)

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हिंदू परिवार में साबूदाना का अहम महत्व है, यह एक तरह का खाद्य पदार्थ है जिसे साबूदाने के जड़ों के दुध से बनाया जाता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले इसके जड़ को साफ कर, छिला जाता है और फिर पीसकर दुध निकाला जाता है जिसके बाद दुध को टंकी में 3 से 8 घंटे के लिए रखा जाता है, जिससे खराब पदार्थ उपर तैरने लगते हैं और उन्हें छाना जा सकता है। जमे हुए दुध के केक को खास मशीन के द्वारा छोटे कणों में बदला जाता है। इन छोटे कणों को छन्नी से आकार अनुसार छांटा जाता है और गरम प्लेट में ज़रुरत अनुसार भुना जाता है।

साबूदाने को बाद में धूप में सूखाया जाता है। कभी-कभी इन्हें चमकीला बनाने के लिए पॉलिश किया जाता है। साबूदाना भारत में बच्चों के खाने के लिए और सुबह के नाश्ते के रुप में बेहद मशहुर है। क्योंकि साबूदाना स्टार्च से भरपुर होता है और साथ ही ऊर्जा से और इसमें किसी भी प्रकार के आर्टिफिशियल स्वीटनर या रसायनिक पदार्थ नहीं होते।

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व्रत में साबूदाना

साबूदाना का नाम हम हिंदूओं के घरों में तभी सुनने को मिलता है, जब कोई व्रत-त्योहार आने वाला होता है क्योंकि यह एक ऐसी खाद्य सामग्री है जिसे व्रत का आहार माना जाता है। देखा जाए तो ये पूर्ण शाकाहारी है जो व्रत के नियम के अनुसार सात्विक भोजन है। अगर हम कहें कि वर्षों से व्रत के दौरान खाया जा रहा साबूदाना शाकाहारी नहीं बल्कि मांसाहारी है तो क्या आप यकीन करेंगे?

ये सुनकर शायद पहली बार में किसी को यकीन नहीं हो क्योंकि हम सभी व्रत में इसका सेवन करते हैं। लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिसे जानने के बाद आपको भी यह शक होगा कि साबूदानाशाकाहारी है या मांसाहारी। कुछ बातों को जानने के बाद आपको भी साबूदाना की सात्विकता पर शक़ होने लगेगा। व्रत के दौरान साबूदाना का प्रयोग जोरो-शोरों से किया जाता है। व्रत नवरात्रि का हो या कोई भी साबूदाना एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसे व्रत का ही भोजन माना गया है जिसमें सबसे ज्यादा मशहूर साबूदाना की खिचड़ी है। हालांकि लोग इसके अलावा लड्डू, हलवा आदि ऐसे व्यंजन हैं जो साबूदाना के प्रयोग से ही बनाए जाते हैं।

बताते चलें कि व्रत के दौरान साबूदाना पेट को भरा रखते हैं और कमजोरी नहीं आने देते। वैसे व्रत में फल एवं अन्य कुछ चीजें भी खाई जा सकती हैं, लेकिन साबूदाना एक ऐसी चीज है जिस पर लोगों की सबसे अधिक नजर रहती है क्योंकि इसे बनाना भी आसान है और यह स्वाद में भी अच्छा होता है। वैसे तो हिन्दू परिवारों में साबूदाना को बिना व्रत होने पर भी खाया जाता है क्योंकि साबूदाना के गुण इसे स्वास्थ्य के लिए अच्छा बनाते हैं लेकिन जिन तथ्यों से हम आपको परिचित कराने जा रहे हैं, उन्हें जानने के बाद अगली बार आप साबूदाना खाने से पहले दस बार सोचेंगे।

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शाकाहारी है या मासांहारी

दरअसल साबूदाना शाकाहारी है या मासांहारी इसका जवाब तो आपको इसके बनने की प्रक्रिया में ही मिल जाएगा। जी हां क्योंकि आप ये सोच रहे होंगे कि साबूदानापूर्ण रूप से प्राकृतिक है तो आखिर ये मांसाहारी कैसे हो सकता है? हालांकि ये कहना गलत नहीं है कि साबूदानाएक प्राकृतिक वनस्पति है। यह सागो पाम के पौधे के तने व जड़ में पाए जाने वाले गूदे से बनाया जाता है लेकिन बात इसके मांसाहारी होने की तब हो जाती है जब यह जिस तरह से ये बनता है।

दरअसल बाजार में मिलने वाला साबूदाना अगर आप खा रहे हैं तो वह मांसाहारी है। क्योंकि विशेषरूप से वो साबूदाने जो तमिलनाडु की कई बड़ी फैक्ट्रियों से बनकर आते हैं। अगर आप नहीं जानते तो बता दें कि तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर सागो पाम के पेड़ पाए जाते हैं इसलिए देश में यही एक ऐसा राज्य है जहां पर बड़ी मात्रा में साबूदाना का निर्माण होता है।

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