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स्वतंत्रता दिवस विशेष: भारत कैसे बन सकता है वैश्विक महाशक्ति ? (Independence Day Special : How India can become a global superpower)

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वैश्विक

हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है बस जरूरत है सही मार्गदर्शन की। लेकिन क्या सिर्फ प्रतिभा से भारत एक महाशक्ति यानि की सुपरपावर के रूप में उभर सकता है? यह नहीं हो सकता क्योंकि वैश्विक स्तर पर सुपरपावर के रूप में भारत को उभरने के सामने कई सारी बाधाएं हैं। हालांकि अगर पिछले कुछ समय से देखा जाए तो वैश्विक रूप से सुपरपावर बनने के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा है। यही नहीं इन प्रयासों के कारण वो अपने लक्ष्य के करीब भी है। विद्वानों का कहना है कि कुछ सालों बाद भारत को एक महाशक्ति के रूप में देखना संभव होगा।

अगर आपने गौर किया होगा तो मोदी सरकार के कार्यकाल में पिछले कुछ सालों से सरकार ने भारत को वैश्विक रूप पर प्रदर्शित करने का काफी प्रयास किया, चाहे वो योग के जरिए हो या फिर मेक इन इंडिया, शक्तिशाली देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंध हो, आतंकवाद का खात्मा हो, पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक या फिर चीन की नींद हराम करने की रणनीति भारत ने इन सभी के जरिए दुनिया के सामने यह दिखा दिया कि वो किसी से कम नहीं है। हर क्षेत्र में अब भारत पहले से काफी आगे हैं। इन सभी योजनाओं के जरिए अगर लगातार प्रयास किया जाए तो वो दिन दूर नहीं है जब भारत विश्व में एक महाशक्ति के रूप में जाना जाएगा।

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भारत के योग को विश्व ने अपनाया

अगर आपको याद होगा तो साल 2015 में पीएम मोदी ने विश्व के 192 देशों को ‘योगपथ’ पर चलने की पहल की थी जिसके बाद पूरे विश्वभर में योग का डंका बजने लगा। आधुनिकता के साथ अध्यात्म का यह पथ दुनियाभर के लोगों को पसंद आया और देखते ही देखते 192 देशों ने इसका समर्थन किया। अब पूरी दुनिया योग शक्ति से आपस में जुड़ी हुई महसूस करने लगी है।

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आज के समय में योग को पूरी दुनिया में एक नई दृष्टि से देखा जाने लगा है। यह अनायास नहीं है कि पूरी दुनिया में योग का डंका बज रहा है। भारत ने विश्व को आध्यात्मिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। शून्य की तरह विश्व को भारत की सबसे बड़ी देन योग को माना जा रहा है। दरअसल योग एक विचार नहीं बल्कि भारतीय जीवन पद्धति है जिसमें भारतीय जीवन मूल्य यानि संस्कृति समाहित हैं।

स्किल इंडिया मिशन से युवाओं को मिली राह

कौशल भारत-कुशल भारत के अंतर्गत सरकार द्वारा स्किल इंडिया मिशन की शुरूआत की गई। जिसका लक्ष्य है देश के गरीब व वंचित युवाओं के हुनर को प्रशिक्षण द्वारा निखारकर बाजार योग्य बनाकर प्रमाण-पत्र देते हुये उनके लिए रोजगार का सृजन करना। यही नहीं भारत में तकनीकी शिक्षण प्रक्रिया में सुधार लाकर उसे विश्व मांग के अनुरुप ढालना भी इस योजना का उद्देश्य है। भारत में परंपरागत शिक्षा पाठ्यक्रम प्रचलन में है जिससे कि हम विश्व में तेजी से हो रहे परिवर्तनों के साथ अपने आप को गतिशील नहीं बना पा रहे हैं और यही वजह है कि आज भी बेराजगार है।

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इसलिए आवश्यकता है कि हम अपने शैक्षिक पाठ्यक्रम में विश्व मांग के अनुसार बदलाव लाये। इस योजना के अंतर्गत इन सभी बातों पर ध्यान दिया गया जिससे आने वाले दशकों में किस तरह के कोशल की माँग सबसे अधिक होने वाली है उसे ध्यान में रखकर अध्ययन कराने की योजना बनी ताकि अगर इस योजना के तहत युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे तो भारत के युवाओं को रोजगार के सबसे अधिक अवसर मिलेंगे। इस तरह स्किल इंडिया मिशन एक आन्दोलन है, न कि सिर्फ एक कार्यक्रम।

वैश्विक विनिर्माण में सहायक बना ‘मेक इन इंडिया’

‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत 25 सितंबर, 2014 को देशव्यापी स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र के विकास के उद्देश्य से की गई थी। इसके तहत भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था। खास बात तो यह है कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल में अर्थव्यवस्था के 25 प्रमुख क्षेत्रों जैसे-ऑटोमोबाइल, खनन, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

वहीं यह कहना गलत नहीं होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मज़बूत करने के लिये दुनिया भर से निवेश आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं। पहल का एक मुख्य उद्देश्य भारत में रोज़गार के अवसरों को बढ़ाना है। इसके तहत देश के युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस पहल के जरिए विनिर्माण क्षेत्र के विकास पर काफी ध्यान दिया जा रहा है, जो न केवल व्यापार क्षेत्र को बढ़ावा देगा, बल्कि नए उद्योगों की स्थापना के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को भी बढ़ाएगा।

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वैश्विक मूल्यों पर खरा उतारने के लिए सक्षम है नई शिक्षा नीति

नई शिक्षा नीति जिसे हाल ही में सरकार ने लागू किया है, इसे लेकर तमाम सवाल भी लोग उठा रहे थें। कई शिक्षकों, छात्रों व अभिभावकों के मन में इस नई शिक्षा नीति को लेकर डर भी बना हुआ था। इसी दौरान पीएम मोदी ने इन सभी डर को दूर करते हुए इसके तमाम फायदों को गिनाया। दरअसल देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक वैश्विक मूल्यों पर खरा उतारने में सक्षम बताया जा रहा है। वर्षों से चल रहे पुराने ढर्रे पर चल रहे एजुकेशन सिस्टम के कारण नई सोच, नई ऊर्जा को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा था जिसकी वजह से इसमें बदलाव बेहद जरूरी था।

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पुराने एजुकेशन सिस्टम में लंबे समय से बड़े बदलाव नहीं हुए थे। परिणाम यह हुआ कि हमारे समाज में उत्सुकता और कल्पना के मूल्यों को बढ़ावा देने के बजाय भेड़चाल को ही प्रोत्साहन मिलने लगा। कभी डॉक्टर, कभी वकील, कभी इंजिनियर बनाने की होड़ लगी। दिलचस्पी, क्षमता और मांग की मैपिंग के बिना इस होड़ से छात्रों को बाहर निकालना जरूरी था। इस योजना का मूल मंत्र यह है कि अभी तक हमें ‘वाट टु थिंक’ सिखाया जाता था जबकि इस शिक्षा नीति में ‘हाउ टु थिंक’ पर बल दिया जा रहा है।

इस तरह से हो रहे बदलाव के कारण भारत एक नई राह पर चलता नजर आ रहा है इसमें कोई दो राय नहीं है कि आगे चलकर कुछ सालों बाद भारत एक सुपरपावर बनेगा।

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