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इस लॉकडाउन में मानसिक विकारों से कैसे मिलेगा छुटकारा

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mental disorders in lockdown

एक स्वस्थ शरीर के लिए मन का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है, इसलिए कहा जाता है कि जब व्यक्ति खुश रहता है तो वो अंदर से भी फिट महसूस करता है। लेकिन ऐसा होता नहीं है टेंशन व भागदौड़ भरी इस दुनिया में इंसान के मन में हमेशा कई तरह के विकार उत्पन्न होते रहते हैं, जिनमें से कुछ ऐसे होते हैं जिनके बारे में वो किसी से खुलकर बात नहीं कर पाता है। पुराने जमाने में तो लोग मानसिक विकारों से उत्पन्न रोगों को समझ नहीं पाते थें जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति को काफी कुछ सहना पड़ता था।

कई बार तो इन रोगियों को अंधविश्वास के दलदल में भी धकेल दिया जाता था, इसे दूर करने के लिए झाड़-फूंक, तंत्र मंत्र व अन्य अजीबों गरीब तरीके अपनाए जाते थें। इसके अलावा एक वक्त ऐसा भी चला जब मानसिक पीड़ित लोगों को पागलखानों में तालों के भीतर बंद रखा जाता था और अपमानजनक तरीके से उनका उपचार किया जाता है।

लेकिन अब ऐसा नहीं होता, धीरे-धीरे वक्त के साथ-साथ लोग काफी जागरूक हो गए हैं। इतना ही नहीं मेडिकल साइंस ने भी मनोविज्ञान के क्षेत्र में काफी तरक्की कर लिया है और इससे जुड़ी संस्थाओं ने लोगों के बीच जागरूकता भी फैलाई है। अब लोग किसी भी तनाव या फिर अवसाद से ग्रसित होते हैं तो मनोचिकित्सक से परामर्श लेने जाते हैं क्योंकि मनोवैज्ञानिक मानसिक व्याधियों के कारण और निदान के ज्ञाता होते हैं, इसलिए उनके पास मनुष्य के हर प्रकार के मानसिक तनाव की समस्याओं का निदान होता है। इन समस्याओं के निदान के लिए मनोचिकित्सक कई तरीके अपनाते हैं, जैसे काउंसलिंग करना, दवाओं के जरिए, परामर्श देकर, मेडिटेशन के जरिए आदि।

मानसिक विकारों की समस्याओं का निदान

देखा जाए तो ये जो माहौल पिछले कुछ महीनों से बना है इसकी वजह से दुनिया में हज़ारों-लाखों लोग मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस कर रहे हैं क्योंकि बीते कुछ दिनों से घर में बंद रहने के कारण लोगों में मानसिक विकारों जैसे डर, अकेलेपन और अनिश्चितता का माहौल बन गया है और लोग दिन-रात इससे जूझ रहे हैं। इसे आप यूं समझ सकते हैं कि लोगों के मन में डर कोरोना वायरस से संक्रमित होने का है, अनिश्चितता नौकरी और कारोबार लेकर है वहीं अकेलापन लॉकडाउन के कारण आया एकाएक अकेले होने से है।

अब ऐसे में इन स्थितियों असर ये होता है कि लोगों में स्ट्रेस बढ़ने लगता है। स्ट्रेस के भी कई स्तर होते हैं सामान्य स्टेज वाले स्ट्रेस हमारे शरीर पर उतना असर नहीं डालते हैं, लेकिन जैसे जैसे यह बढने लगता है इसका असर शरीर, दिमाग़, भावनाओं और व्यवहार पर पड़ता है। इसलिए इस मानसिक तनाव की स्थिति से बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है वरना तनाव अंतहीन हो सकता है। और इसकी वजह से व्यक्ति रोज़मर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाएंगे। वैसे ये स्ट्रेस हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। यह किसी को भी हो सकता है, फिर चाहे वह आदमी हो या औरत, जवान हो या बुज़ुर्ग, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़ कोई भी इसका शिकार हो सकता है।

इस तनावग्रस्त माहौल में आपके मन में ये भी आ रहा होगा कि मौजूदा हालात में किसी मनोचिकित्सक से परामर्श लेने उसके क्लिनिक जाना भी कोरोना को न्यौता देने जैसा होगा। ऐसे में आपके पास एक विकल्प है जिसे आप घर बैठे अपना सकते हैं और अपने मानसिक विकारों को भी दूर कर सकते हैं, इसमें आपकी मदद करेंगी मनोवैज्ञानिक विनीता हरिया।

सबसे पहले ये बता दें कि विनिता हरिया को मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगभग 10 सालों का अनुभव प्राप्त है। इनके सत्र में आप सभी संबंधों के मुद्दों और काम के तनाव के लिए परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। ये भावनात्मक और व्यक्तिगत उपचार भी करती हैं। मनोचिकित्सक विनिता हरिया समग्र विकास में दृढ़ता से विश्वास करती है और वो व्यक्तित्व के सभी मापदंडों पर काम करने के लिए चिकित्सा का उपयोग करती है। अगर आप भी पिछले कुछ दिनों से अपने अंदर किसी भी तरह के मानसिक विकार व अवसाद महसूस कर रहे हैं तो मनोवैज्ञानिक विनीता हरिया से मदद ले सकते हैं।

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