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कुंडली मिलान कैसे करें? (Kundli matching For compatibility)

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अगर आप हिंदू धर्म में विश्वास रखते हैं तो आपको यह पता ही होगा कि इसमें कई संस्कार होते हैं। इसिलिए कहा जाता है कि सनातन संस्कृति की नींव षोडश संस्कारों पर ही निहित है। जिनमें से एक संस्कार होता है विवाह जिसका हर व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है और इसके लिए कुंडली मिलान की भी अहम भूमिका रहती है। तभी तो हर माता पिता को बच्चों के युवा होते ही उनके विवाह की चिंता सताने लगती है।

विवाह का विचार मन में आते ही माता-पिता के सामने जो सबसे बड़ी चिंता होती है और वो है अपने बेटे या बेटी के लिए योग्य जीवनसाथी की तलाश। इस तलाश के पूरी होते ही एक दूसरी चिंता सामने आ खड़ी होती है, वह है भावी दंपत्ति की कुंडलियों का मिलान जिसे ज्योतिष की भाषा में मेलापक कहा जाता है। अगर आपको याद होगा तो प्राचीन समय में कुंडली-मिलान अति आवश्यक माना जाता था। हालांकि अब यह बस एक परंपरा बनकर रह गया है जो कई लोग निभाते हैं और कुछ नहीं भी।

क्यों जरूरी है कुंडली मिलान

यह काफी अहम सवाल है जो हर किसी के मन में आता है, खासकर युवाओं के मन में कि आखिर शादी के लिए कुंडली मिलान क्यों करना चाहिए? तो संक्षिप्त में आपको बता दें कि कुंडली मिलान के माध्यम से ये पता चलता है की किस स्तर तक ग्रह वर और वधु को आशीर्वाद दे रहे है और कौन से ज्योतिष परिहार करने से विवाह में खुशियां आ सकती है।

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कुंडली मिलान के लिए लड़के और लड़की के जन्म विवरण के द्वारा अष्टकूट गुण के ३६ गुण मिलान के आधार पर किया जाता है। अगर आप ज्योतिष में विश्वास रखते होंगे तो आपको ये पता ही होगा कि ग्रहों और खगोलीय पिंड का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है इसलिए जब भी विवाह की बात आये तो ये जरुरी है की ग्रह अपना आशीर्वाद दे ताकि वैवाहिक जीवन में वर वधू के बीच सामंजस्य रहे, खुशियां, सफलताएं और शांति बनी रहे। खुशहाल और आनंदमय दांपत्य जीवन सुनिश्चित करने के लिए जोड़ों के बीच योग्यता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ऐसे करते हैं कुंडली मिलान

विवाह से पहले किए जाने वाले कुंडली मिलान को अष्टकूट मिलान भी कहते हैं। इसमें लड़के और लड़की के जन्मकालीन ग्रहों तथा नक्षत्रों में परस्पर साम्यता, मित्रता तथा संबंध पर विचार किया जाता है। शास्त्रों में मेलापक के 2 भेद बताए गए हैं। एक ग्रह मेलापक तथा दूसरा नक्षत्र मेलापक। वहीं इनके आधार पर दोनों की शिक्षा, चरित्र, भाग्य, आयु तथा प्रजनन क्षमता का पता चलता है। इनका आकलन किया जाता है।

नक्षत्रों के ‘अष्टकूट’ तथा 9 ग्रह (परंपरागत) इस रहस्य को व्यक्त करते हैं। अष्टकूट सूत्र में दोनों के आपसी गुणधर्मों को 8 भागों में बांटा गया है। ये 8 गुण जन्म राशि एवं नक्षत्र पर आधारित हैं। 8 गुणों को क्रमश: 1 से 8 अंक दिए गए हैं, जो कुल मिलाकर 36 होते हैं जिसमें 18 या उससे अधिक गुणों का मिलान विवाह और दाम्पत्य सुख के लिए उत्तम माना जाता है।

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कुंडली मिलान के लिए इन 11 बिंदुओ पर गौर किया जाता है जिसके बिना मिलान करना असंभव है तो आइए जानें कौन से हैं वो तत्व जिनपर विचार किया जाता है:

  1. नक्षत्र मिलान या अष्टकूट मिलान
  2. ग्रहों की अनुकूलता
  3. भाव अनुकूलता
  4. नवमांश अनुकूलता
  5. लैंगिक अनुकूलता
  6. वित्तीय अनुकूलता
  7. पारिवारिक अनुकूलता
  8. मानसिक अनुकूलता
  9. पारस्परिक सम्मान की अनुकूलता
  10. विनम्रता अनुकूलता
  11. कुजा या मंगल अनुकूलता

ऐसे में यह हमारे वैवाहिक जीवन के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है इसलिए हम कहेंगे कि जो लोग शादी करना चाहते हैं उन्हें यह भी ज्ञात होना चाहिए की एक शादी विवाह नहीं है बल्कि 2 व्यक्तियों के परिवारों और आने वाली पीढ़ियों का एक फैसला होता हैं । यह एक बड़ा जीवन समय निर्णय है इसलिए 30 मिनट अपने लिए निकालें लेकिन सही समय और सही अवस्था में इसलिए शादी करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष सलाहकार से सही प्रकार का चार्ट मिलान या गुण मिलान कराएं।

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