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क्या आप भी हैं डिप्रेशन में? इससे निकलने में हम कर सकते हैं आपकी मदद

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Deal with Depression

आज की इस दुनिया में भले ही आधुनिक हो चुकी है और आजादी की बात करती है लेकिन हर कोई अपने आप में ही कैद होते जा रहा है। ये एक ऐसी आजादी है जिसे पाकर लोग अपने आप में ही सिकुड़ते जा रहे है, अंतत: परिणाम ये देखने को मिल रहा है कि लोग डिप्रेशन में जा रहे हैं जिसे मनोवैज्ञानिक भाषा में अवसाद भी कहा जाता है। ये मानसिक विकारों में से एक होता है, कई बार तो लोग इसे समझ नहीं पाते हैं लेकिन अगर कोई व्यक्ति डिप्रेशन या अवसाद से पीड़ित होता है तो उसकी रोज की दिनचर्या भी प्रभावित होने लगती है।

कुछ सर्वे के अनुसार पता चला है कि अवसाद को दुनियाभर में होने वाला चौथा सबसे बड़ा रोग माना जाता था पर इस साल इसकी संख्या में ऐसी बढ़ोत्तरी हुई है कि अनुमान है कि बेहद जल्द ही यह अब दूसरे नंबर पर आने वाला है। WHO के अनुसार, भारत के लोग आज दुनिया में सबसे अधिक अवसाद से पीड़ित है।

अब इन बातों को सुनने के बाद आपके मन में एक सवाल अवश्य आ रहा होगा कि आखिर अवसाद कैसे होता है ? तो बता दें कि अभी तक इसका स्पष्ट रूप से मिल नहीं पाया है, क्योंकि किसी व्यक्ति को चिंता होना सामान्य है और वो किसी भी वजह से हो सकती है। लेकिन यही चिंता जब लंबे समय तक आपको घेरे रहती है तो व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है।

आज हम आपको अपने इस लेख के जरिए ये बताएंगे कि डिप्रेशन से बचने के उपाय क्या हैं और इस गंभीर मानसिक बीमारी में जाने से खुद को कैसे रोक सकते हैं? इसके लिए आप चाहे तो किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह ले सकते हैं जो आपको इससे उभरने में मदद करेंगी। इसके अलावा उनके सुझाव के साथ आपको रोजमर्रा की जिंदगी में इन आदतों को अपनाना चाहिए जो कि आपके लिए काफी मददगार साबित होगी।

डिप्रेशन से बाहर आने के लिए करें ये काम

योग है बेहतर विकल्प

अगर आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में जा रहे हैं या फिर आप लंबे समय से किसी तनाव से गुजर रहे हैं तो इसके लिए व्यायाम आपकी काफी मदद कर सकता है। क्योंकि व्यायाम न सिर्फ आपको शारीरिक रूप से ही स्वस्थ रखता, बल्कि यह आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माना जाता है। मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है कि व्यायाम करने से शरीर में तो ऊर्जा का संचार के साथ ही साथ मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन्स भी रिलीज होते हैं, जो कि लोगों को अवसाद से बाहर आने में काफी मदद करते हैं।

फैमिली को दे समय

आज के समय में किसी के पास वक्त नहीं है हर कोई अपने अपने काम में इतना ब्यस्त हो गया है कि वो अपने रिश्तों के लिए भी वक्त नहीं निकाल पाता है। जिसकी वजह से कुछ ही समय में व्यक्ति को अकेलापन महसूस होने लगता है और देखते ही देखते वो अवसादग्रस्त हो जाता है। कोशिश करें कि अगर आप कितने भी ब्यस्त क्यों न हो पर किसी भी तरह से अपने परिवार, दोस्तों व करीबियों के लिए कुछ समय जरूर निकालें। ऐसा करने से आप इस मानसिक तनाव का शिकार होने से बच सकते हैं।

डिप्रेशन से निकलना तो काम को दें ब्रेक

हममें से कई लोग काम में इतने बिजी हो जाते हैं कि वह खुद को आराम देना जरूरी ही नहीं समझते। इतना ही नहीं कई बार तो इन्हें छुट्टी के दिन भी काम करने की आदत पड़ जाती है। ऐसे में जब धीरे धीरे इनपर वर्क प्रेशर बढ़ता है तो वो मानसिक दबाव में आने लगते हैं और देखते ही देखते व्यक्ति डिप्रेशन की गिरफ्त में आ जाता है। ऐसे में आप खुद को पंद्रह दिन या महीने में एक छुट्टी का दिन अवश्य लें क्योंकि इससे आपको मेंटली रिलैक्स महसूस करेंगे। 

खाने का रखें ख्याल

अब बारी आती है आपके डाइट की, आपको लग रहा होगा कि डिप्रेशन में खाने से क्या मतलब ? लेकिन ये सच है कि खाना सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं होता, बल्कि यह आपको शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बनाता है। आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी कि जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन। इसलिए अपने खाने का खास ख्याल रखें। कोशिश करें कि अपनी डाइट में हेल्दी फूड ही शामिल करें। जितना हो सके, मौसमी फल व सब्जियां खाएं। इसमें मौजूद विटामिन व मिनरल्स सिर्फ आपके तन को ही नहीं, मन को भी तंदरूस्त रखते हैं।

मानसिक विकारों से ग्रसित लोगों के लिए विनीता एम. हरिया एक प्रमाणित मनोवैज्ञानिक हैं, जो कि इन समस्याओं के लिए एक बेहतर मनोवैज्ञानिक काउंसलर साबित हो सकती है।

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