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क्या तनाव, चिंता व अवसाद बन सकता है शारीरिक बीमारियों का मुख्य कारण ?

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तनाव, चिंता व अवसाद

कोई भी इन्सान कब परेशान होता है जब काफी प्रयास के बावजूद उसका कोई काम नही हो पा रहा होता है, जब उसका परिवार उसे समझ नहीं पा रहा होता है। जब आपको हर जगह से असफलता और ताने सुनने को मिल रहे होते हैं। इस तरह की परिस्थितियों से जूझते-जूझते वो काफी तनाव में रहने लगता है, उसे फिर हर वक़्त एक ही बात की चिंता सताती है कि ऐसा नहीं किया तो क्या होगा ? या फिर वैसा किया तो लोग क्या कहेंगे? देखते ही देखते ये वजह उसे तनाव, चिंता व अवसाद में पहुंचा देती है। यह एक सामान्य किंतु गम्भीर मनोविकार है, यह हमारे अंदर नकारात्मक विचारों और कृत्यों का उत्पन्न करता है।

कुछ मायनों में अवसाद या डिप्रेशन को हम ‘रोग’ या ‘बीमारी’ की तरह देखते हैं जबकि कुछ जानकारों का मानना है यह कोई बीमारी नहीं बल्कि व्यक्ति के मनःस्थिति का एक चरण होता है। अवसाद के अनेक कारण होते हैं जैसे व्यक्ति के प्रेम संबंध, हार्मोन, मौसम, तनाव, बीमारी, नशा, कुपोषण, आनुवांशिकता, अप्रिय स्थितियों में लंबे समय तक रहना, शरीर के किसी हिस्से में तकलीफ आदि प्रमुख हैं। किसी भी व्यक्ति के जीवन में अपने जीवनसाथी के प्रति काफी ज्यादा लगाव होता है और आमतौर पर डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण यही होता है। हालाँकि आपको एक बात पर गौर करना चाहिए कि चिंता, तनाव व अवसाद की वजह से हम कई तरह की शारीरिक बिमारियों से भी घिरते चले जाते हैं।

तनाव, चिंता व अवसाद से होने वाले रोग

जब आप किसी एक ही बात को लेकर हर वक़्त सोचते हैं उसी के बारे में विचार करते रहते हैं तो निश्चित रूप से ऐसा करने से आपको काफी नुकसान पहुँचता है। लगातार मानसिक दबाव या तनाव ना सिर्फ मानसिक विकारों को बल्कि कई तरह की शारीरिक बिमारियों को भी जन्म देता है। आइये आपको बताते हैं तनाव, चिंता, अवसाद के कारण कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं।

समय से पहले बुढ़ापा

अक्सर ही देखा गया है कि तनाव, चिंता, अवसाद आदि से पीड़ित लोगों में समय से पहले बुढ़ापा आने का खतरा काफी ज्यादा होता है। देखा जाये तो पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर (पीटीएसडी) कई मानसिक विकारों जैसे अवसाद, क्रोध, अनिद्रा, जैसे रोगों तथा मादक द्रव्यों के सेवन से जुड़ी गंभीर समस्या है।

माइग्रेन

विशेषज्ञों के अनुसार काफी ज्यादा तनाव लेने से या लम्बे समय से डिप्रेशन यानी अवसाद में होने पर दिमाग में खुन के थक्के भी जैम सकते हैं जो आगे चलकर अक्सर माइग्रेन का रूप ले लेते हैं। माइग्रेन, युवा महिलाओं में ज्यादातर पाया जाता है। यह भी देखा गया है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में माइग्रेन का खतरा ज्यादा पाया जाता है। निश्चित रूप से इसका कारण ज्यादा तनाव में रहना, हर वक़्त अवसाद से घिरे रहना हो सकता है।

डिमेंशिया

तनाव, अवसाद व हर वक़्त चिंता करने वाले लोगों में डिमेंशिया होने का खतरा सामान्य से दो गुना अधिक बढ़ जाता है। डिमेंशिया से इंसान की मानसिक क्षमता, व्यक्तित्व और व्यवहार पर काफी ज्यादा असर पड़ता है, इसकी वजह से उनकी याद्दाश्त पर असर पड़ता है। चिकित्सक भी इस बात की सलाह देते हैं कि कम उम्र के युवाओं को किसी भी विषय चाहे वो पढ़ाई हो या फिर रिलेशनशिप इन मामलों को लेकर उन्हें ज्यादा तनाव नहीं लेना चाहिए। इसकी वजह से आगे चल कर उनके दिमाग पर काफी असर पड़ सकता है और संभवतः वो डिमेंशिया के शिकार हो सकते हैं।

मधुमेह

विशेषज्ञों के अनुसार मधुमेह की मुख्य वजहों में चिंता और तनाव का सबसे बड़ा रोल मना गया है। यदि कोई व्यक्ति अवसाद ग्रस्त है तो उसे मधुमेह होने की संभावना सामान्य व्यक्ति के अपेक्षा दुगनी होती है। आज कल की जीवनशैली में लोगों को मधुमेह उनके खानपान से ज्यादा उनके काम के दबाव और चिंता तथा तनाव की वजह से हो रहा। ऐसे में यह सबसे ज्यादा आवश्यक है की अपने खानपान पर तो ध्यान दें ही साथ ही साथ खुद को रिलैक्स भी रखें।

हृदय रोग

आपको पता होना चाहिए कि अगर आप लम्बे समय से तनाव और अवसाद से गुजर रहे हैं तो आपको जल्द से जल्द इसका इलाज और रोकथाम कर लेना चाहिए और उस वक़्त तो यह सबसे ज्यादा जरूरी हो ज्यादा है जब आप किशोरावस्था में होते हैं। क्योंकि इसका असर आग चलकर दिखता है और वयस्क होने पर दिल की बीमारी का खतरा कम हो सकता है।

कैंसर

यह जानकार आपको काफी ज्यादा हैरानी होगी कि कैंसर के तक़रीबन 60 फीसदी रोगी तनाव, चिंता और अवसाद से भी ग्रस्त होते हैं। अत्यधिक अवसाद में रहने के कारण व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बदल जाता है। किसी के अवसाद ग्रस्त होने के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आनुवांशिक तथा जैव वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। अवसाद से पीडि़त रोगी का उपचार आमतौर पर सायकोथैरेपी के द्वारा किया जाता है।

मनोचिकित्सक से करें संपर्क

मानसिक समस्या ऐसी होती है कि इनपर ध्यान नहीं दिया जाए तो ये आपको कई तरह से परेशान करती है। इसलिए आवश्यकता है कि समय रहते अपने विकारों को समझें और एक अनुभवी मनोचिकित्सक से मिलें। हमारे नेटवर्क पर मौजूद नैदानिक मनोचिकित्सक डॉ हर्षल राउत आपकी मानसिक समस्या का इलाज करेंगे। डॉ हर्षल राउत मनोचिकित्सा, माइंडफुलनेस, और ध्यान के लिए अवसाद, चिंता, तनाव, मधुमेह और पीसीओएस की समस्या से निजात दिलाते हैं। वो समझते हैं कि जीवन कभी-कभी मुश्किलें काफी बड़ी आ जाती है और हम सभी उस समय चाहते हैं कि एक सुरक्षित स्थान पर रहे जहां हमें कोई सही राह दिखा सके।

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