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अष्‍टांग योग अपना कर करिए शारीरिक कल्याण के साथ मानसिक और आत्मिक शुद्धि

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यह बात तो हम सब जानते हैं कि इस बदलते परिवेश और महामारी के दौर में योग या स्वस्थ्य फिटनेस हमारे जीवन के लिए और हमारे शरीर के लिए कितना लाभप्रद है. अब इनमें से अगर बात करें अष्‍टांग योग की तो इसमें योग के कुल आठ तरीके हर तरह से हमारे शरीर को स्‍फूर्ति देते हैं और हमें स्‍वस्‍थ रखते हैं.

अष्टांग योग, योग की सबसे प्रचलित अवधारणा है. ध्यान से समाधि को प्राप्त करने के लिए योग के आठ अंगों से गुजरना आवश्यक होता है.  इसकी महर्षि पतंजलि ने अपने ग्रंथ ‘पतंजलि योग सूत्र’ में व्याख्या की है. यदि इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें, तो महर्षि पतंजलि ने योग की संपूर्ण परंपरा को; उसके सारे अंगों को 8 सोपानों में बांटकर व्याख्या की है, इन्हीं को अष्टांग योग कहा जाता है।अष्टांग योग में आठ अंग क्रमशः  यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और फिर ध्यान से समाधि हैं.  

अष्टांग योग विशेषज्ञ प्रियंका शर्मा स्पष्ट करती है कि बिना शरीर और मन की सफाई के समाधि की स्थिति तक पहुंचना संभव नहीं है, ये क्रमशः  यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं.प्रियंका मुंबई की एक अनुभवी योग ट्रेनर हैं। वे घर और काम की चुनौतियों को संतुलित करते हुए, स्वस्थ जीवन जीने के लिए, महिलाओं को अनुकूलित फिटनेस कार्यक्रम प्रदान कर रही हैं. अष्टांग योग विशेषज्ञ प्रियंका शर्मा हज़ारों महिलाओं और लोगों को अष्टांग योग के माध्यम से स्वस्थ शरीर का उपहार दे चुकी हैं. योग विशेषज्ञ प्रियंका कहती हैं:-

“आजकल की तनाव और चिंता भारी ज़िंदगी में अष्टांग-योग एक तरह से अमृत है.  यूं तो अष्टांग-योग मूल रूप से संस्कृत में लिखित है . लेकिन मूल रूप से ना तो यह कोई धार्मिक ग्रंथ है और ना ही यह किसी देवता से प्रेरणा प्राप्त है, दरअसल अष्टांग-योग एक संपूर्ण जीवन शैली है जिसके अभ्यास से हम शारीरिक कल्याण के साथ मानसिक और आत्मिक शुद्धि के रास्ते खोलते हैं. आज के दौर में जब ख़ासकर महिलायें जिन्हे अपने लिए भी समय नही मिलता उनके लिए अष्टांग, आठ आयामों वाला वो रास्‍ता है जिसमें वे अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी को संतुलित करके निश्चित ही स्वस्थ शरीर की कामना कर सकते हैं.”

तो आइए जानते हैं अष्टांग-योग के आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के बारे में:-

1. यम

योग के इस अंग के माध्यम से आप खुद पर संयम रखने का प्रयास करते हैं यह हमें अनुशासन सीखाता है .यम में, ऋषि पतंजलि ने 5 तपों अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य  को साझा किया है जो बताते है कि हम दुनिया के साथ कैसे प्रतिध्वनित होते हैं या हम बाहरी दुनिया के साथ शांति से कैसे रहते हैं. यम हमें सामाजिक रूप से उन्नत होने के लिए प्रेरित करते हैं।

2. नियम

नियम हमें सिखलाता है कि आप अपने आप से शांति कैसे प्राप्त कर सकते हैं. नियम के साथ शरीर के बाहरी पवित्रता के साथ आंतरिक पवित्रता के साथ अग्रसर होते हैं. हम पवित्रता, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर भक्ति ये पांचों नियमों से अपने व्यक्तित्व को और सुदृढ़ और शक्तिशाली बनाते .

3. आसन

आसन मतलब शरीर की मुद्रा, जिसमें स्थिरता और सुख दोनों मिले वही आसन कहलाते है. हमें ध्यान लगाने के लिए कोई न कोई आसन की ज़रूरत होती है जो कई प्रकार के हो सकते हैं. ये ध्यान करने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत उपयोगी है .

4. प्राणायाम

आसन के बाद आता है प्राणायाम. ऐसा अधिकत्तर लोगों के साथ होता है जब वो ध्यान लगाने की चेष्टा करते हैं तो स्वत: कई प्रकार के विचार उनके मन-मस्तिष्क में घर कर जाते हैं. प्राणायाम मन को वश में करने और चित्त की चंचलता को शांत करके उसे एकाग्र करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. यह भी कई प्रकार का होता है जैसे सूर्य भेदन, उज्जायी, शीतली शीतकारी और भस्त्रिका इत्यादि.

5. प्रत्याहार

यह इंद्रियों पर नियंत्रण करने का विज्ञान है. इसमें इंद्रियों को बाहरी संसार से हटाकर अंतर्मुखी किया जाता है.

6. धारणा

मन को किसी स्थान अथवा विषय विशेष पर लगा कर रखने का नाम ही है धारणा है.

7- ध्यान

धारणा में लगे हुए उस एक ही वस्तु में लगातार लगे रहना ही ध्यान है.

8- समाधि

ध्यान ही समाधि हो जाता है, जब उस धारणा में लगाई हुई वस्तु की ओर ही मन रह जाता है व अपने धरती पर होने का अहसास ही नही रहता है.

इस तरह आप अष्टांग-योग को अपना कर से ध्यान से समाधि तक पहुच सकते हैं. साथ ही इससे आप चिंता और परेशानियों से भारी रोजमर्रा की ज़िंदगी को  शारीरिक कल्याण के साथ मानसिक और आत्मिक शुद्धि प्राप्त कर, संतुलित कर सकते हैं.

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